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फर्लो के उल्लंघन की सिर्फ़ एक घटना हुई है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी को 45 दिन के आपातकालीन पेरोल की अनुमति दी

LiveLaw News Network
31 July 2020 4:00 AM GMT
फर्लो के उल्लंघन की सिर्फ़ एक घटना हुई है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी को 45 दिन के आपातकालीन पेरोल की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए हत्या के एक मामले में दोषी आशा तायडे को 45 दिनों के आकस्मिक पेरोल पर जाने की अनुमति दी है कि फर्लो छुट्टी का सिर्फ़ एक बार उल्लंघन हुआ है। तायडे को आजीवन कारावास की सज़ा हुई है और वह यरवदा जेल पुणे में अपनी सज़ा काट रही है।

न्यायमूर्ति आरडी धानुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट की खंडपीठ ने आशा की बहन शोभा की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। शोभा ने COVID 19 के कारण आशा के लिए छुट्टी की अर्ज़ी दी। उसकी याचिका में कहा गया कि वर्तमान संकट को देखते हुए उसकी बहन ने पेरोल के लिए आवेदन दिया था लेकिन उसकी छुट्टी इस आधार पर नामंज़ूर कर दी गई क्योंकि इससे पूर्व उसने समय पर आत्मसमर्पण नहीं किया था और 574 दिनों के बाद ही वापस आयी थी।

याचिकाकर्ता के वकील रूपेश जायसवाल ने कहा कि COVID 19 के कारण सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले और राज्य सरकार के 26 मई 2020 के सर्कुलर में कहा गया है कि अथॉरिटीज़ को पेरोल की अर्ज़ी को ख़ारिज नहीं करना चाहिए था।

फिर, यह बात भी है कि शोभा की बहन आशा 12 साल 6 महीने की सजा भुगत चुकी है और रेमिशन को अगर ध्यान में रखा जाए तो वह 19 साल की सजा भुगत चुकी है। इस तरह वह अपनी सजा का बड़ा हिस्सा पूरी कर चुकी है। इस स्थिति में और वर्तमान स्थिति को देखते हुए आशा को आपातकालीन पेरोल पर रिहा कर दिया जाना चाहिए, उसके वक़ील ने कहा।

जायसवाल ने आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता अब आगे परोल के किसी भी तरह के नियम का उल्लंघन नहीं करेगी।

एपीपी एसआर शिंदे ने परोल की अपील ख़ारिज करने के जेल अधीक्षक के आदेश का समर्थन किया।

पीठ ने दलील सुनने के बाद कहा,

"रिकॉर्ड के अनुसार, पेरोल का उल्लंघन 574 दिनों के लिए सिर्फ़ एक बार ही हुआ है और इसके अलावा रिकॉर्ड में और कुछ नहीं है। फिर, याचिकाकर्ता धारा 302 के तहत हुए अपराध के लिए जेल की सज़ा भुगत रही है और …यह महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग की अधिसूचना नंबर 4400/2020 के तहत नहीं आता।"

इस अधिसूचना के अनुसार, सिर्फ़ यूएपीए, एमसीओसीए, पीएमएलए के अधीन आने वाले क़ैदी को ही परोल पर छोड़े जाने की छूट नहीं है ताकि जेलों में भीड़भाड़ को कम किया जा सके।

कोर्ट ने अंत में कहा -

"हमें इस बात पर ग़ौर किया है कि याचिककर्ता अपनी सज़ा का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुकी है जो कि 19 साल से अधिक है और अभियोजन से इसको गंभीर चुनौती नहीं है। इस बात को ध्यान में रखते हुए और महामारी की भी, हमारी राय है कि इस मामले पर विचार ज़रूरी है और याचिकाकर्ता की बहन, आशा जो कि पूना तायडे की पत्नी, अभियुक्त नंबर 2465, यरवदा केंद्रीय जेल, पुणे को 45 दिनों के परोल पर आकस्मिक पेरोल लीव (COVID-19) पर छोड़ा जा सकता है।"

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