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"गंभीर मामला": दिल्ली हाईकोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा निर्धारिती फर्म को कथित रूप स्थगन संबंधित भेजे गए ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच के निर्देश दिए

LiveLaw News Network
22 July 2021 9:38 AM GMT
गंभीर मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा निर्धारिती फर्म को कथित रूप स्थगन संबंधित भेजे गए ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच के निर्देश दिए
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दिल्ली हाईकोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा एक निर्धारिती फर्म को कथित रूप से भेजे गए स्थगन ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच का निर्देश दिया और दोनों पक्षकारों में से जिसने यह गैर-कानूनी (जाली दस्तावेज बनाना) काम किया है उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी।

पीठ ने देखा कि मामला गंभीर है क्योंकि किसी एक पक्ष ने या तो जाली दस्तावेज बनाए हैं या सच नहीं कह रहे हैं।

न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने इस प्रकार कहा कि,

"यह न्यायालय यह उल्लेख कर सकता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है कि इस देश के नागरिक जो इस न्यायालय के असाधारण क्षेत्राधिकार का उपयोग करते हैं, वे जालसाजी और अभियोजन के आरोपों से भयभीत नहीं हैं और वह भी उन अधिकारियों द्वारा जो पूछताछ करके देखभाल के कर्तव्य का पालन नहीं करते हैं कि क्या ईमेल किसी अन्य विंग या राजस्व विभाग द्वारा जारी किया गया है।"

31 मई को निर्धारिती फर्म थ्री सी होम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फर्म को स्थगन प्रदान करने वाले आयकर विभाग से एक ईमेल प्राप्त हुआ। उक्त ईमेल "DONOTREPLY@incometaxindiaefiling.gov.in" से प्राप्त हुआ था।

याचिकाकर्ता कंपनी द्वारा उत्तर प्रस्तुत करने के लिए समय मांगने के लिए स्थगन की मांग की गई क्योंकि उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा लगाए गए विभिन्न लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल कंपनी के रिकॉर्ड तक पहुंचने में असमर्थ है।

जबकि मामले को ईमेल के माध्यम से 14 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, कंपनी को 1 जून को एक मूल्यांकन आदेश प्राप्त हुआ जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।

दूसरी ओर, प्रतिवादी ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में जाली दस्तावेज़ को बनाया क्योंकि विभाग द्वारा कंपनी से सभी संचार delhi.dcit.cen6@incometax.gov.in से किए गए थे।

न्यायालय ने उक्त दलील सुनने के बाद आदेश दिया कि,

"किसी भी अधिकारी ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने से पहले और रिट याचिका के अभिसाक्षी के खिलाफ भले ही प्रथम दृष्टया झूठी गवाही और जालसाजी का गंभीर आरोप लगाने से पहले उक्त जांच की होगी। नतीजतन, इस न्यायालय की राय में उक्त DCIT, CC-06 की पेशकश में वास्तविक कमी है।"

कोर्ट ने इसके अलावा निर्देशित किया कि,

"चूंकि आरोप वित्त मंत्रालय/आयकर विभाग से संबंधित एक संवेदनशील सर्वर से संबंधित है और इसमें एक संवेदनशील पद धारण करने वाले आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह न्यायालय केंद्रीय एजेंसी अर्थात केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश देता है कि वह यह जांच करे कि क्या याचिकाकर्ता को ईमेल दिनांक 31 मई, 2021 (अनुलग्नक पी -4) जारी किया गया था या नहीं और यदि हां, तो किसके द्वारा।"

अदालत ने सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए आदेश दिया कि अधिकारी अगले आदेश तक याचिकाकर्ता कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगे।

कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले की सुनवाई छह सितंबर को होगी।

केस का शीर्षक: थ्री सी होम्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम सहायक आयकर आयुक्त, केंद्रीय मंडल 6, नई दिल्ली

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:



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