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सीमापुरी हिंसा मामला : अदालत ने आरोपी का बोन टेस्ट कराने की अनुमति दी

LiveLaw News Network
27 Dec 2019 5:29 PM GMT
सीमापुरी हिंसा मामला : अदालत ने आरोपी का बोन टेस्ट कराने की अनुमति दी
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दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को पुलिस को नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली के सीमापुरी इलाके में हिंसक प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी की उम्र का पता लगाने के लिए अस्थि परीक्षण (बोन टेस्ट) कराने की अनुमति दी। दावा किया जा रहा है कि आरोपी नाबालिग है।

पुलिस द्वारा अदालत के सामने यह प्रस्तुत किया कि आरोपी के पास कोई वैध आयु प्रमाण नहीं है और उसे परीक्षण आयोजित करने की आवश्यकता है। इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गीता ने आरोपी के बोन टेस्ट कराने का निर्देश दिया।

अदालत ने जीटीबी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को 28 दिसंबर को परीक्षण करने का निर्देश दिया और पुलिस को 30 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा।

अदालत ने कहा,

"अदालत की राय में अभियुक्त का बोन टेस्ट आवश्यक है क्योंकि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 में उल्लेख किए गए किसी भी दस्तावेज़ को अभियुक्त की ओर से पेश नहीं किया गया है। इस तरह के किसी भी दस्तावेज के अभाव में बोन टेस्ट ही अंतिम उपाय है, जिसके द्वारा आरोपी की आयु निर्धारित की जा सकती है।"

अदालत अधिवक्ता जाकिर रजा और मोनिस रईस के माध्यम से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि आरोपी नाबालिग है।

सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपनी उम्र साबित करने के लिए वकील द्वारा जो दस्तावेज पेश किए हैं, वे मान्य नहीं हैं, क्योंकि वे एक मदरसे द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र हैं, जहां उसने पढ़ाई की।

पुलिस ने कहा कि आरोपी के पास कोई अन्य आयु प्रमाण उपलब्ध नहीं था और इसलिए उम्र का पता लगाने के लिए बोन टेस्ट किया जाना चाहिए।

अधिवक्ता रजा ने इसका विरोध किया और कहा कि केंद्र की अधिसूचना के अनुसार, मदरसा का प्रमाण पत्र किसी की उम्र साबित करने के लिए वैध दस्तावेज है।

अदालत ने पहले जांच अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को सत्यापित करें और आज तक एक रिपोर्ट दायर करें। इस बीच, मामले में गिरफ्तार 10 अन्य आरोपियों ने अदालत में जमानत याचिका दायर की।

आरोपियों में से एक अमजद खान ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि वह प्रदर्शनकारी भीड़ का हिस्सा भी नहीं था और किसी भी कथित अपराध में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

याचिका में आगे कहा गया है कि उसके सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटों के कारण उसे तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता है।

यह भी कहा गया है कि आरोपी को सांस की समस्या है और इसलिए उसे अपने परिवार की देखभाल में बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी।

पूरा मामला कुछ पुलिसकर्मियों के आरोप पर टिका है और आरोपियों की हिरासत को सही ठहराते हुए कोई विस्तृत जांच नहीं की है। याचिका में आरोप लगाया गया कि बहुत देर से एफआईआर दर्ज की गई।

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