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RDBA,SARFAESI,IBC नहीं है मनी लाॅड्रिंग से प्रबल, होना चाहिए आपसी समझ का समन्वय-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
8 April 2019 5:05 AM GMT
RDBA,SARFAESI,IBC नहीं है मनी लाॅड्रिंग से प्रबल, होना चाहिए आपसी समझ का समन्वय-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
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दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि रिकवरी आॅफ डेब्ट एंड बैंक्रेप्सी एक्ट,एसएआरएफएईएसआई एक्ट व इंसोलवंसी एंड बैंक्रेप्सी कोड कभी भी प्रीवेंशन आॅफ मनी लाॅड्रिंग एक्ट के प्रावधानों पर प्रबल नहीं हो सकते है।

जस्टिस आर.के गाबा ने कहा है कि यह सभी कानून आपसी समझ व समन्वय के तहत लागू होने चाहिए। न कि एक दूसरे को नीचा दिखाए या उसका अपमान करे। मामले में उपलब्ध तथ्यों का आदर करना चाहिए,जिनके आधार पर पीएमएलए के तहत प्रोसिड आॅफ क्राइम हुआ है।

हाईकोर्ट इस मामले में अपीलेट ट्रिब्यूनल (ंपीएमएलए एक्ट के तहत गठित) के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। जिसने अपने आदेश में माना था कि आरडीबीए,एसएआरएर्फएएसआई एक्ट व आईबीसी,पीएमएलए एक्ट के वैधानिक प्रावधानों से प्रबल है।

अपीलेट ट्रिब्यूनल के विचार से असहमत होते हुए कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए के तहत अटेचमेंट की प्रक्रिया सिविल सेंशन प्रकृति की होती है। जो मनी लाॅड्रिंग के अपराध के मामले में जांच व आपराधिक एक्शन के समांतर चलती है। कोर्ट ने कहा कि इंपावरड इंफोरसमेंट आॅफिसर के पास पीएमएलए के तहत यह अॅथारिटी होती है कि वह टेंटिड प्राॅपर्टी,जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आपराधिक गतिविधि के तहत ली गई हो,उसको अटैच कर सकता है। बल्कि उसके पास यह भी अधिकार होता है कि मनी लाॅड्रिंग के आफेंडर की इतने ही मूल्य की किसी अन्य संपत्ति को भी जब्त कर सकता है। भले यह दूसरी संपत्ति टेंटिड नहीं होती है,परंतु उसे टेंटिड संपत्ति माना गया है क्योंकि उसका लिंक अपराध से पाया गया है। कोर्ट ने निम्न टिप्पणी की है।

  • इंपावरड इंफोरसमेंट आॅफिसर के पास पीएमएलए के तहत यह अॅथारिटी होती है कि वह टेंटिड प्राॅपर्टी,जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आपराधिक गतिविधि के तहत ली गई हो,उसको अटैच कर सकता है। बल्कि उसके पास यह भी अधिकार होता है कि मनी लाॅड्रिंग के आफेंडर की इतने ही मूल्य की किसी अन्य संपत्ति को भी जब्त कर सकता है। भले यह दूसरी संपत्ति टेंटिड नहीं होती है,परंतु उसे टेंटिड संपत्ति माना गया है क्योंकि उसका लिंक अपराध से पाया गया है।
  • मनी लाॅड्रिंग के मामले में अगर सबूतों से यह पता चल रहा है कि टेंटिड प्राॅपर्टी है,जिसे निश्चित अपराध से संबंधित है या उसके द्वारा कमाए गए पैसे से ली गई है,परंतु किसी कारण यह प्राॅपर्टी मिल नहीं रही है तो द्वोषपूर्ण पाई गई है तो इंपावरड इंफोरसमेंट आॅफिसर मामले के आरोपी की इतनी ही मूल्य की किसी अन्य संपत्ति को अटैच कर सकता है।
  • मनी लाॅड्रिंग मामले में अगर आरोपी किसी संपत्ति के अटैच करने पर आपत्ति जताता है और कहता है कि यह सपंत्ति अपराध के पैसे से नहीं ली गई है तो इस बात को साबित करने का पूरा भार उसी पर होगा।

पीएमएलए के तहत अटैच संपत्ति में किसी तीसरे पक्ष के अधिकार के मामले में कोर्ट ने निम्न टिप्पणी की है।

  • मनी लाॅड्रिंग के मामले के आरोपी के अलावा अगर किसी तीसरे व्यक्ति की संपत्ति अटैच की जाती है और यह पाया जाता है कि यह सपंत्ति पहले आरोपी के पास ही थी या इस संपत्ति को लिंक अपराध से जुड़ा है,ऐसे में इस संपत्ति को अपनी बताने वाले तीसरे व्यक्ति को खुद साबित करना होगा कि यह संपत्ति उसकी है।
  • पीएमएलए के तहत अटैच किसी प्राॅपटी में तब तक किसी तीसरे व्यक्ति का चार्ज शून्य नहीं होगा,जब तक पेश तथ्यों से यह साबित नहीं हो जाता है कि ऐसा सिर्फ कानून से बचने के लिए किया गया था।
  • पीएमएलए के तहत अटैच की गई किसी संपत्ति में किसी तीसरे व्यक्ति को 'बोनाफाइड थर्ड पार्टी' दावेदार बनने के लिए पुख्ता सबूत दर्शाने होगे। उसे बताना होगा कि इस संपत्ति में कानूनी तौर पर उसका हक है। वह किसी भी तरह से मनी लाॅड्रिंग के अपराध में शामिल नहीं था और उसने सभी कानून का पालन किया है।
  • पीएमएलए के तहत किसी संपत्ति को अटैच करना सिर्फ इस आधार पर अवैध नहीं कहा जा सकता है क्योंकि आरडीबीए और एसएआरएफएईएसआई एक्ट के तहत एक्सप्रेशन शब्द के तहत सिक्योरड क्रेडिटर का उस संपत्ति में पहले से सिक्यारेड इंटरेस्ट है। वहीं अगर किसी टेंटिड मानी गई संपत्ति के अटैच करने के बाद कोई तीसरा पक्ष यह दावा करता है कि यह उसकी है और इसके लिए सबूत भी पेश करता है और दावा करता है कि यह संपत्ति उसे अपराध के आसपास के समय में ही ली थी। ऐसे में इस संपत्ति को अटैचमेंट से रिलीज करने के लिए अतिरिक्त तौर पर यह साबित करना होगा कि संपत्ति लेते समय सभी सावधानी बरती गई थी और इसके लिए किया गया लेन-देन भी सही था।
  • अगर कोई ऐसी स्थिति पैदा होती है कि पीएमएलए के तहत अटैच की जाने वाली संपत्ति में तीसरे पक्ष का एक सीमित अधिकार है तो ऐसे में तीसरा पक्षकार बाकी मूल्य के लिए इंफोरसमेंट अॅथारिटीज के प्रति जिम्मेदार होगा।
  • अगर संपत्ति को अटैच करने का आदेश अंतिम रूप ले लेता है या उसे जब्त करने का आदेश दे दिया जाता है या पीएमएलए के सेक्शन 4 के तहत केस की सुनवाई शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में उस संपत्ति में किसी का सही हक था या नहीं,इसकी जांच व उसका फैसला स्पेशल कोर्ट द्वारा ही किया जाएगा।


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