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धार्मिक आधार पर निजी अस्पताल ने कथित रूप से इलाज से किया इनकार, उड़ीसा हाईकोर्ट ने किडनी के मरीज की मौत की जांच तेज़ी से करने के निर्देश दिए

LiveLaw News Network
1 May 2020 9:13 AM GMT
धार्मिक आधार पर निजी अस्पताल ने कथित रूप से इलाज से किया इनकार, उड़ीसा हाईकोर्ट ने किडनी के मरीज की मौत की जांच तेज़ी से करने के निर्देश दिए
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उड़ीसा हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को कटक निवासी एक व्यक्ति सईद अब्दुल हसन की मौत की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया। मृतक व्यक्ति को लॉकडाउन के दौरान कथित तौर पर उसके धर्म के आधार पर एक निजी अस्पताल में इलाज से वंचित कर दिया गया था।

वकील-एक्टिविस्ट अज़रा जमाल ने कटक में शांति नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इस अस्पताल शांति नर्सिंग होम ने 10 अप्रैल को सईद अब्दुल हसन का इलाज करने से इनकार कर दिया था।

अस्पताल ने उन्हें कथित रूप से तालिबागी जमात घटना के मद्देनजर अस्पताल में प्रवेश से वंचित कर दिया था और अस्पताल में उन्हें डायलिसिस कराने की अनुमति देने के लिए "COVID-19 टेस्ट रिपोर्ट दिखाने को कहा था।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अस्पताल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देना चाहिए कि सार्वजनिक अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पताल और नर्सिंग होम भी पंथ, रंग, लिंग, धर्म और जाति के आधार पर बिना भेदभाव किए हर मरीज़ को इलाज उपलब्ध कराएं।

महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किए जाने के बाद कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर कलेक्टर, कटक द्वारा जांच की जा रही है, हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया और जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।

न्यायमूर्ति एस पुजारी और न्यायमूर्ति केआर महापात्र की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि

" हम कलेक्टर को इस निर्देश के साथ इस मामले का निपटारा करते हैं कि वे तेज़ी से जांच करके मामले में आवश्यक कदम उठाने के लिए अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेंगे।"

महाधिवक्ता ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में कोई व्यक्ति किसी भी आधार पर इलाज से वंचित न रहे।

इस पहलू पर पीठ ने कहा,

"राज्य यह भी सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति सरकारी या निजी किसी भी अस्पताल द्वारा किसी भी बीमारी के इलाज से वंचित नहीं रहे, अगर ऐसी सुविधा अस्पताल के पास उपलब्ध है या नहीं है तो उसे उपयुक्त अस्पताल में रेफर करे जहाँ ऐसी सुविधा उपलब्ध है।

हालांकि, उपचार को राज्य सरकार द्वारा COVID -19 महामारी के मद्देनजर दिए गए दिशानिर्देशों / निर्देशों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। "

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