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"निर्णय देने के लिए कुछ नहीं बचा", बॉम्बे हाईकोर्ट ICSE और ISC परीक्षा रद्द करने पर दायर याचिकाओं पर कार्यवाही औपचारिक रूप से बंद की

LiveLaw News Network
29 Jun 2020 2:54 PM GMT
"निर्णय देने के लिए कुछ नहीं बचा", बॉम्बे हाईकोर्ट ICSE और ISC परीक्षा रद्द करने पर दायर याचिकाओं पर कार्यवाही औपचारिक रूप से बंद की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ़ सेकेंड्री एजुकेशन (ICSE) और ISC (कक्षा 12 वीं) बोर्ड की 2 जुलाई को होने वाली परीक्षाओं को रद्द करने की मांग करने वाली अभिभावकों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट के 26 जून के आदेश के प्रकाश में औपचारिक रूप से बंद करने का फैसला किया।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एसएस शिंदे की पीठ ने दसवीं और बारहवीं के छात्रों के माता-पिता द्वारा दायर जनहित याचिकाओं के बैच को सुना और देखा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और आईसीएसई दोनों बोर्ड द्वारा 25 जून को सुप्रीम कोर्ट में यह बताने के बाद कि COVID 19 महामारी के मद्देनज़र उन्होंने कक्षा 12वीं और कक्षा 10वीं की परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है, इस मामले में कुछ शेष नहीं बचता है।

इससे पहले, CISCE ने पीठ को सूचित किया था कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद लंबित परीक्षाओं को पूरा करने की एक पद्धति तैयार की जाएगी।

पीठ ने 26 जून के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों को दर्ज किया, जिसमें कहा गया था कि किसी भी अदालत में लंबित शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 के लिए आईसीएसई द्वारा दसवीं और बारहवीं कक्षा के लिए परीक्षा आयोजित करने के विषय से संबंधित सभी कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट के 26 जून के आदेश से नियंत्रित किया जाएगा और उसके अनुसार निस्तारण किया जाए।

महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही बॉम्बे उच्च न्यायालय को सूचित किया कि COVID -19 महामारी की मौजूदा स्थिति के कारण राज्य में आईसीएसई बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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