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फेक न्यूज़ अलर्ट : सरकार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को COVID​​-19 से संबंधित जानकारी पोस्ट करने की अनुमति नही, वाली खबर झूठी

LiveLaw News Network
6 April 2020 6:15 PM GMT
फेक न्यूज़ अलर्ट : सरकार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को COVID​​-19 से संबंधित जानकारी पोस्ट करने की अनुमति नही, वाली खबर झूठी
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सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप में एक फर्ज़ी खबर व्यापक रूप से प्रसारित की जा रही है कि सरकार के अलावा, किसी अन्य व्यक्ति को COVID​​-19 से संबंधित किसी भी जानकारी को पोस्ट करने या साझा करने की अनुमति नहीं है।

यह गलत संदेश इस प्रकार है:

"प्रियजनों,

सभी के लिए जनादेश :

आज रात 12 (मध्यरात्रि) से देश भर में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू हो गया है। इसके अनुसार, COVID​​-19 से संबंधित किसी भी अपडेट/ जानकारी को सरकारी विभाग के अलावा, किसी अन्य नागरिक को पोस्ट करने या कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी खबर को साझा करने की अनुमति नहीं है और यह दंडनीय अपराध है। ग्रुप एडमिन से अनुरोध है कि वे उपरोक्त अपडेट पोस्ट करें और समूहों को सूचित करें।

कृपया इसका सख्ती से पालन करें। "

LiveLaw पर प्रकाशित एक रिपोर्ट की वेब लिंक इस भ्रामक संदेश के साथ बाहर से जुड़ी हुई है, ताकि यह नकली संदेश विश्वसनीय लगे।



संदेश के साथ देखी जाने वाली लाइव लॉ रिपोर्ट 31 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट है, जिसमें केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है कि कोई भी मीडिया आउटलेट सरकार द्वारा दिए गए मेकेनिज़्म से तथ्यों की पुष्टि किए बिना COVID -19 पर कुछ भी प्रिंट, प्रकाशित या प्रसारित न करे।

इस रिपोर्ट का फर्जी संदेश से कोई संबंध नहीं है। प्रसारित हो रहा फर्ज़ी संदेश इस खबर को व्यक्त नहीं करता है।

31 मार्च को प्रकाशित रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी। प्रवासी भारतीयों के कल्याण के लिए दिशा-निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं और महामारी के फैलने को नियंत्रित करने के उपायों पर दाखिल जवाब में केंद्र द्वारा दी गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से यह प्रार्थना की थी।

गृह सचिव अजय भल्ला IAS द्वारा दी गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि

"इस अभूतपूर्व स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया या वेब पोर्टलों में से किसी की भी जानबूझकर या अनजाने नकली या गलत रिपोर्टिंग से समाज के बड़े हिस्से में घबराहट पैदा करने की गंभीर और अपरिहार्य संभावना है। "

स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि "संक्रामक बीमारी की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, जिससे दुनिया निपटने के लिए संघर्ष कर रही है, ऐसी रिपोर्टिंग के आधार पर समाज के किसी भी वर्ग की प्रतिक्रिया न केवल ऐसी स्थिति के लिए हानिकारक होगी बल्कि पूरे राष्ट्र को नुकसान पहुंचाएगी। इसलिए, यह न्याय के सबसे बड़े हित में है कि जब इस अदालत ने संज्ञान लिया है, तो यह अदालत एक दिशा निर्देश जारी करने की कृपा करे कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक / प्रिंट मीडिया / वेब पोर्टल या सोशल मीडिया केंद्र सरकार द्वारा दिए गए मैकेनिज़्म से सही तथ्यात्मक स्थिति का पहले पता लगाने के बिना कुछ भी प्रिंट / प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेगा।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ,

"हम महामारी के बारे में स्वतंत्र चर्चा में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं रखते हैं, लेकिन मीडिया को निर्देशित करते हैं कि घटनाक्रम के बारे में आधिकारिक संस्करण प्रकाशित करे।"

यह स्पष्ट है कि इन घटनाक्रमों के बारे में लाइव लॉ रिपोर्ट किसी भी तरीके से नकली समाचारों की पुष्टि नहीं करता। फिर भी, कुछ शरारती तत्वों ने लाइव लॉ रिपोर्ट को नकली संदेश के साथ जोड़कर भ्रम फैलाया है और समाज के वर्गों को गुमराह किया है।

वास्तव में, प्रेस सूचना ब्यूरो भी इस नकली संदेश के खिलाफ सामने आया है, और स्पष्ट किया है कि इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है।


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