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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम : बृजेश ठाकुर को उम्रकैद, 10 अन्य को भी सज़ा

LiveLaw News Network
11 Feb 2020 1:04 PM GMT
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम : बृजेश ठाकुर को उम्रकैद, 10 अन्य को भी सज़ा
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साकेत कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के अपराध के लिए बृजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास के अलावा अदालत ने बृजेश ठाकुर पर 32 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट ने 3 महिलाओं सहित अन्य 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा भी सुनाई है। इसके अलावा, 4 महिलाओं समेत बाकी 6 दोषियों पर 7 साल की कैद की सजा भी सुनाई गई है। एक महिला दोषी रोज़ी रानी को 6 महीने की कैद की सजा सुनाई गई है। हालांकि, उसे रिहा कर दिया गया क्योंकि वह पहले ही छह महीने से अधिक जेल में सजा काट चुकी थी।

20 जनवरी को सुनाए गए फैसले में साकेत कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में ब्रजेश ठाकुर और 18 अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। बृजेश ठाकुर को बलात्कार, गैंगरेप (आईपीसी की धारा 376 (डी), POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत यौन उत्पीड़न, आपराधिक षड्यंत्र और किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपराध के तहत दोषी ठहराया गया था।

कुछ महिला आरोपियों को आपराधिक षड्यंत्र, अपराध का उन्मूलन, POCSO अधिनियम की धारा 12 और किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था। एक आरोपी विक्की को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था।

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम में कई लड़कियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण किया गया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की एक रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा सामने आया था। वर्तमान मामले के आरोपियों में बिहार के राजनेता ब्रजेश ठाकुर, शेल्टर होम के कुछ कर्मचारी और बिहार समाज कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल थे।

सभी 20 आरोपियों पर आईपीसी की धारा 120 बी, बलात्कार, और POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत उत्तेजित यौन उत्पीड़न के तहत आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने केस को बिहार से POCSO कोर्ट, साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कॉम्प्लेक्स, में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था।

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