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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था अपनाने के लिए निर्देश जारी किये

LiveLaw News Network
2 May 2020 3:27 PM GMT
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था अपनाने के लिए निर्देश जारी किये
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देश में COVID-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए.के. मित्तल द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर व खंडपीठ ग्वालियर व इंदौर तथा प्रदेश के समस्त जिला न्यायालयों में प्रकरणों की सुनवाई हेतु तकनीक आधारित वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था अपनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं, जिससे अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई होने के साथ-साथ लॉकडाउन अवधि में जारी किये जा रहे दिशा-निर्देशों का पालन किया जा सके।

साथ ही सामाजिक दूरी बनाये रखते हुए अभिभाषक, पक्षकार, पुलिस, न्यायाधीश व हितग्राहियो को इस महामारी के संंक्रमण से सुरक्षा प्रदान की जा सके।

इस सबंध में हाईकोर्ट जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल श्री राजेंद्र कुमार वाणी ने अवगत कराया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय व जिला न्यायालयों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।

इनमें न केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से प्रकरणों के संचालन की गाइडलाइन जारी की गई है, अपितु शासकीय अभिभाषको और अधिवक्तओं को स्वयं के मोबाइल फोन पर Vidyo Mobile App के माध्यम से न्यायालयों को सम्बद्ध करते हुए सुनवाई का अवसर प्रदान किये जाने सबंधी व्यवस्था प्रदान की गई है।

इस बाबत दिनांक 16.04.2020 व 21.04.2020 को वृहद दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। श्री वाणी ने यह भी अवगत कराया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से सुनवाई को सुगम बनाने हेतु उच्च न्यायालय के सेंट्रल प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर श्री एफ.एस. काजी से सराहनीय तकनीकी सहयोग अभिप्राप्त किया गया है और आवश्यक हेल्पलाइन नंबर सर्वसाधारण के लिये वेबसाइट पर प्रकाशित किये गये हैं।

इस हेल्पलाइन सुविधा से हितधारक कोई भी तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को सुगम बनाने हेतु एवं आवश्यक समन्वय् स्थापित करने के लिये संभागीय स्तर पर जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर में नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं।

जिला न्यायालय स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु सामान्य गाइड लाइन जारी की गई है। श्री वाणी ने जानकारी देकर यह भी अवगत कराया है कि जिला न्यायालयों के लिये निर्मित गाइडलाइन अंतर्गत अत्यावश्यक प्रकृति के प्रकरणों में अधिवक्ता जिला न्यायालय की ई-मेल आईडी पर अपने आवेदन पत्र प्रस्तुत करेंगे। वहीं पुलिस इन आवेदन पत्रों से सम्बद्ध प्रकरणों की केस डायरी की सॉफ्ट कॉपी पीडीएफ/इलेक्ट्रानिक प्रारूप पर मय प्रतिवेदन व अपनी आपत्ति सहित प्रस्तत करेंगे ताकि भौतिक रूप से दस्तावेजों के स्थान पर डिजिटल फॉर्म में प्रस्तुत केस डयरी, प्रतिवदेन का न्यायालय अवलोकन करेंगे।

पुलिस द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला प्रतिवेदन प्रकरण से संबंधित शासकीय अधिवक्ता को उनके ई-मेल अथवा सोशल मीडिया नंबर पर प्रेषित किया जाएगा, जिससे कि उन्हें अपने निवास स्थान से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु जोड़ा जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था अंतर्गत सुनवाई में यह भी निर्देशित किया गया है उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में एक पृथक कक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम स्थापित किया जावे, ताकि पक्षकार या अधिवक्ता व्यक्तिशः न्यायालय में उपस्थित ना हों बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करे, जिससे सामाजिक दूरी के निर्देशों का पालन हो तथा उनका पक्ष सुविधापर्वूक न्यायालयों में प्रस्तुत हो सके।

न्यायालयों को यह भी निर्देशित किया गया है कि सुनवाई उपरांत वह पारित न्यायालयीन आदेशों को अविलंब न्यायालयों में कार्यरत सीआईएस सॉफ्टवेयर पर अपलोड़ करें ताकि पक्षकार डिजिटल फॉर्म में आदेशों की प्रतियों को प्राप्त कर सके।

न्यायालयों में तकनीकी प्रक्रियाओं के उपयोग से न्यायालयीन कार्यवाही में भाग लेने वाले सभी हितग्राहियों के मध्य जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है, वहीं न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान महामारी के संंक्रमण को रोकने का प्रभावी प्रयास किया जा रहा है।

श्री वाणी ने इस व्यवस्था की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए यह भी वर्णित किया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था अंतर्गत सुनवाई का सबसे बडा़ फायदा यह है कि अधिवक्ता अपने निवास स्थान से ही Vidyo Mobile App के माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही में भाग लेकर अपनी बात रख सकते हैं।

आवश्यक दस्तावजेों को ई-मेल के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे उन्हें घर से बाहर जाने और संक्र्मित होने की संभावना निर्मूल हो जाती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत वे अपने पक्ष को उसी प्रकार रख सकते हैं, जैसे वे न्यायालय के समक्ष व्यक्तिशः उपस्थित हों।

श्री वाणी ने माननीय मुख्य न्यायाधिपति के निर्देशानुसार लागू किये गये इन ठोस प्रयासों एवं सतत् पर्यवेक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए जानकारी दी कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सफलतापूर्वक अत्यावश्यक प्रकृति के मामलों की सुनवाई निरंतर सुनवाई हो रही है।

अब तक उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ सहित खंडपीठ में 196 से अधिक प्रकरणों में तथा जिला न्यायालयों में 12496 से अधिक प्रकरणों में सुनवाई हो चुकी है। सुनवाई की इस अत्याधुनिक तकनीकी प्रक्रिया से लाभान्वित होने वाले सभी हितग्राहियों ने उच्च न्यायालय जबलपुर के अभिनव प्रयासों की सराहना की है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के साथ-साथ जिला न्यायालय ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, हरदा, छिंदवाड़ा, देवास आदि कई जिलों में इस प्रकार की कार्यवाही को मीडिया द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रकाशित किया गया है तथा जनसामान्य द्वारा इसकी सराहना की गई है एवं उन्हें इस प्रक्रिया का अधिकाधिक उपयोग कर लाभ लिये जाने की प्रार्थना भी की गई।


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