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दिल्ली के श्रम मंत्रालय ने एनएलयू-डी से कहा, हाउसकीपिंग के सभी कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखने के लिए ठेकेदार से बातचीत करे

LiveLaw News Network
18 March 2020 5:30 AM GMT
दिल्ली के श्रम मंत्रालय ने एनएलयू-डी से कहा, हाउसकीपिंग के सभी कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखने के लिए ठेकेदार से बातचीत करे
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दिल्ली के श्रम मंत्रालय और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के हाउसकीपिंग कर्मचारी को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हटाने को लेकर सभी संबंधित पक्षों के बीच बैठक के बाद मामले को सुलझाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

इस बैठक के बाद बैठक के पीठासीन अधिकारी अनिल घिल्डियाल, विशेष अधिकारी, श्रम मंत्रालय ने सभी 55 सफ़ाई कर्मचारियों को नौकरी में बनाए रखने के लिए नए ठेकेदार से बातचीत करने की बात विश्वविद्यालय से कही। इन लोगों को 'वाइट फ़ॉक्स एंड गोल्डन' के साथ कॉंट्रैक्ट समाप्त हो जाने के बाद नौकरी से हटा दिया गया था।

इस पृष्ठभूमि में, एनएलयू-डी के छात्रों ने 4 जनवरी 2020 को आंदोलन शुरू कर दिया। इन लोगों को नौकरी से हटाने से पहले किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया गया था।

विश्वविद्यालय ने राजेंद्र मैनज्मेंट ग्रूप (आरएमजी) के साथ नया क़रार किया और छात्रों ने आरोप लगाया कि उसका टेंडर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पास कर दिया गया और जनशक्ति की ज़रूरत का दिल्ली सरकार ने आवश्यक आकलन नहीं किया गया।

छात्र इन सभी कर्मचारियों को काम पर रखे जाने की माँग कर रहे हैं और आरएमजी के साथ हुए क़रार को रद्द करने की माँग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय सभी श्रम क़ानूनों और क़ानूनी प्रावधानों का पालन करे।

छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच इस खींचतान के कारण मामला आगे नहीं बढ़ रहा था तब जाकर दिल्ली सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसमें मध्यस्थता की।

छात्रों के अनुसार, श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधि ने विश्वविद्यालय से कहा कि वह आरएमजी से सभी 55 कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए बातचीत करने को कहा और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनका क़रार रद्द कर दिया जाएगा और नया टेंडर जारी किया जाएगा।

पहले यह बैठक दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री गोपाल राय को लेनी थी। पर वे इसमें नहीं आ सके और उनके बदले ओएसडी अनिल घिल्डियाल ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

इस मामले को सुलझाने के लिए हो सकता है कि श्रम मंत्री के साथ आगे बैठक हो।

इस ख़बर के बाहर आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि कर्मचारियों को ग़लत तरीक़े से नहीं हटाया गया है, जैसा कि आरोप लगाया गया है। चूँकि पूर्व ठेकेदार के साथ उनके क़रार को समाप्त कर दिया गया इसलिए उन्हें काम से वंचित किया गया। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि नए क़रार में कुछ भी ग़ैरक़ानूनी नहीं हुआ है।

विश्वविद्यालय ने कहा कि 55 में से 23 कर्मचारी काम पर लौट चुके हैं।

विश्वविद्यालय ने कहा

"…विश्वविद्यालय ने इन कर्मचारियों को एडजस्ट करने का बहुत प्रयास किया है और 50% से अधिक कर्मचारी विश्वविद्यालय में वापस काम पर आ गए हैं। हम सभी को बता देना चाहते हैं कि शेष कर्मचारी के बारे में भी एनएलडीयू ठेकेदार से बात कर रहा है और उनको विश्वविद्यालय के पाँच किलोमीटर की परिधि के भीतर वैकल्पिक रोज़गार देने की व्यवस्था की है। इसके बाद अब यह मामला शांत हो जाना चाहिए। "

विश्वविद्यालय ने कहा,

"एनएलडीयू हमेशा ही कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखने का वादा नहीं कर सकता क्योंकि उनके काम की प्रकृति ऐसी है कि क़रार बदलने से इनमें से बड़ी संख्या को बदल दिए जाने की संभावना रहती है।"

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