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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में लापता नित्यानंद की ज़मानत रद्द करने की अपील पर नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
2 Feb 2020 9:15 AM GMT
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में लापता नित्यानंद की ज़मानत रद्द करने की अपील पर नोटिस जारी किया
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लापता सवघोषित धर्मगुरु स्वामी नित्यानंद को 2010 में बलात्कार के एक मामले में दिए गए ज़मानत को रद्द करने की अपील पर नोटिस जारी किया।

न्यायमूर्ति जॉन माइकल कूना ने स्थानीय पुलिस को 3 फ़रवरी तक इस नोटिस को जारी और उसी दिन अदालत में इस बारे में रिपोर्ट पेश करने को कहा।

याचिकाकर्ता के वक़ील ने कहा कि नित्यानदं देश से बाहर भाग चुका है, उसका पासपोर्ट रद्द हो चुका है और गुजरात में उसके ख़िलाफ़ दायर मामले के सिलसिले में उसके लिए इंटरपोल को ब्लू कॉलर नोटिस जारी किया जा चुका है।

याचककाकर्ता लेनिन करूप्पन ने कहा कि नित्यानंद को जून 2018 से जो छूट दी गई है उस पर अभियोजन ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। निचली अदालत ने जुलाई 2019 में उसको सम्मन भेजा पर वह अदालत में पेश नहीं हुआ।

ज़मानत पर जेल से बाहर आने पर गुजरात में उसने एक और अपराध किया। ख़बरों के अनुसार, आरोपी ने फ़र्ज़ी पासपोर्ट या दूसरे पासपोर्ट पर भारत छोड़ दिया है और वह मामले की सुनवाई में और फ़ैसला सुनने के लिए मौजूद नहीं हो सकता।

इस पर अदालत ने पूछा,

"निचली अदालत के समक्ष उसकी मौजूदगी क्यों नहीं सुनिश्चित की गई? क्या आपने (अभियोजन) उसको मिली छूट पर आपत्ति उठाई थी?"

राज्य के वक़ील और जाँच अधिकारी ने अदालत को बताया, "आरोपी नंबर 1 (नित्यानंद) भारत में नहीं है। उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है और वह कहाँ है इसका कोई पता नहीं है। हम अब इन तथ्यों को निचली अदालत के समक्ष पेश करनेवाले हैं।"

उसने कहा कि मामला उस स्थिति तक नहीं पहुँची है कि आरोपी की उपस्थिति की ज़रूरत पड़े। अभियोजन ने नोटिस जारी करने के लिए मंगलवार तक का समय माँगा है।

नित्यानंद पर अपनी एक शिष्या से बलात्कार के आरोप में आईपीसी की धारा 376, 377, 420, 506, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है। ख़बर के अनुसार, वह एक्वडॉर भाग गया है और वहाँ कैलाश नाम से एक द्वीप पर अपना अलग देश स्थापित कर लिया है।

याचिकाकर्ता ने एक और अर्ज़ी देकर इस मामले को रामनगर अदालत से बेंगलुरु की किसी अदालत में ट्रांसफ़र करने की माँग की है और न्यायमूर्ति बीए पाटिल ने अभी इस पर फ़ैसला नहीं सुनाया है।

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