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झारखंड विधानसभा में एंटी-लिंचिंग विधेयक पारित; विधेयक में दोषियों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है

LiveLaw News Network
22 Dec 2021 6:00 AM GMT
झारखंड विधानसभा में एंटी-लिंचिंग विधेयक पारित; विधेयक में दोषियों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है
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झारखंड राज्य विधानसभा ने राज्य में मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए झारखंड (मॉब वायलेंस और मॉब लिंचिंग की रोकथाम) विधेयक, 2021 पारित किया। यदि यह राज्यपाल की सहमति प्राप्त करने के बाद कानून बन जाता है, तो झारखंड पश्चिम बंगाल और राजस्थान के बाद एंटी-लिंचिंग कानून बनाने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा।

अधिनियम के उद्देश्य और कारणों का विवरण इस प्रकार है;

"झारखंड राज्य में कमजोर व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा प्रदान करने और भीड़ द्वारा हिंसा और लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए और भीड़ द्वारा हिंसा और लिंचिंग के कृत्यों के लिए दंडित करने के लिए यह कानून जरूरी है।"

बिल के अनुसार, लिंचिंग का मतलब होगा,

"धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, यौन अभिविन्यास के आधार पर हिंसा के कृत्य या मौत का कारण या सहायता या हिंसा का कृत्य करने का प्रयास करना, चाहे प्राकृतिक या नियोजित हो, राजनीतिक संबद्धता, या किसी अन्य आधार पर, वह लिंचिग कहा जाएगा।"

विधेयक में एक आईजी स्तर के अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है, जिसे नोडल अधिकारी कहा जाएगा, जिसका कर्तव्य लिंचिंग की घटनाओं को रोकना होगा [धारा 3 (1)]।

बिल के अनुसार यह जिला मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है कि जब भी उनके पास यह मानने का कारण हो कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जहां उसके अधिकार क्षेत्र के किसी भी क्षेत्र में लिंचिंग की संभावना है, तो वह लिखित आदेश द्वारा ऐसे किसी भी कृत्य को रोक सकता है जो उनकी राय में लिंचिंग के कृत्य के लिए उकसाने की संभावना है [धारा 5 (1)]।

बिल मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों के कर्तव्यों का भी उल्लेख करता है। बिल के अनुसार किसी पुलिस थाने के प्रभारी प्रत्येक पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह किसी भी घटना को रोकने के लिए सभी उचित कदम उठाए, जिसमें लिंचिंग, उकसाना और अपने अधिकार क्षेत्र के तहत क्षेत्र में संभावित प्रसार शामिल है।" [धारा 6]

बिल में मॉब लिंचिंग के दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को आजीवन कारावास तक की सजा का भी प्रावधान है।

अधिनियम के तहत दंड इस प्रकार हैं;

- अगर अधिनियम के तहत पीड़ित को गंभीर चोट लगती है, तो दोषी को आजीवन कारावास या दोनों में से किसी एक अवधि के कारावास से, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना जो ₹3 लाख से कम नहीं होगा और जिसे जाएगा। ₹5 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, से दंडित किया जाएगा। (धारा 8 (2))

- अगर पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, तो दोषी को आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए का जुर्माना की सजा दी जाएगी और चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा। (धारा 8 (3))

- अगर कोई पीड़ित को चोट पहुंचाता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो कि 3 साल तक हो सकता है और जुर्माना कम से कम 1 लाख रुपए होगा और जिसे 3 लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है। (धारा 8 (1))

आम तौर पर, अधिनियम के तहत सभी अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर- कंपाउंडेबल बनाया गया है। विधेयक साजिश करने या उकसाने या सहयोगियों या लिंचिंग के प्रयास के लिए सजा की अनुमति देता है।

इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए सजा; आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार के लिए दंड, और शत्रुतापूर्ण वातावरण उत्पन्न करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करता है।

बिल में लिंचिंग के पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज का भी प्रावधान है। राज्य सरकार ने भी लिंचिंग पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रस्ताव किया है।

विधेयक की कॉपी पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें:



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