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जनता कर्फ्यूः मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश, गरीबों को भोजन और आश्रय उपलब्ध करवाएं

LiveLaw News Network
21 March 2020 7:43 AM GMT
जनता कर्फ्यूः मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश, गरीबों को भोजन और आश्रय उपलब्ध करवाएं
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COVID-19 महामारी से निपटने के उपाय के रूप में इस रविवार को होने वाले ''जनता कर्फ्यू'' के मद्देनजर मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि उन गरीबों और आश्रयहीन लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने चाहिए, जो इन दिनों चल रहे ''संकट'' से सबसे बुरी तरह से प्रभावित होंगे।

विशेष रूप से, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस.एम सुब्रमण्यम ने भी अपने एक महीने के वेतन 2.25 लाख रुपये का योगदान करने का निर्णय लिया है। यह पैसा उन असंगठित श्रम बल के कल्याण के लिए दिया जा रहा है जिन्होंने सामाजिक तौर पर-दूरी बनाने के अभ्यास या सोशल-डिस्टेंसिंग प्रैक्टिस के कारण अपने कमाई का जरिया खो दिया है ,इस संबंध में एक खबर हिंदू अखबार में छपी है। इसी के लिए शनिवार 21 मार्च को एक चेक राज्य के मुख्य सचिव को सौंप दिया जाएगा।

एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति एन. किरुबाकरन और न्यायमूर्ति आर.हेमलता की खंडपीठ का ध्यान महामारी के वर्तमान समय में, देश के वंचित वर्ग के सामने आने वाली कठिनाइयों की ओर गया।

19 मार्च की शाम, प्रधान मंत्री ने 22 मार्च, रविवार को सुबह 7 बजे से 9 बजे तक देशव्यापी जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी।

इसी को देखते हुए , याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ए.पी सूर्यप्रकाशम ने अदालत के सामने कहा कि जो लोग बिना किसी आश्रय के प्लेटफॉर्म पर रह रहे हैं, उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

इस दलील के साथ सहमति जताते हुए पीठ ने कहा कि-

''जैसा कि श्री ए.पी. सूर्यप्रकाशम ने कहा है कि संकट के इन दिनों में, कुली और गरीब श्रमिकों के हित का इस अदालत को ध्यान रखना चाहिए, खासकर ''जनता कर्फ्यू'' के दौरान, क्योंकि यह न्यायालय एक संवैधानिक न्यायालय है।''

इस प्रकार, अपने संवैधानिक कर्तव्य के पालन में, अदालत ने आदेश दिया है कि ''राज्य सरकार ''जनता कर्फ्यू'' के दौरान उपरोक्त गरीबों के लिए भोजन उपलब्ध कराए, क्योंकि उस दिन होटल और दुकानें नहीं खोली जाएंगी।''

अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि यदि आवश्यक हो, तो सरकार को 22 मार्च 2020 (''जनता कर्फ्यू'') को इस काम के लिए सामुदायिक हॉल, मैरिज हॉल और स्कूलों का उपयोग करना चाहिए।

यह बताया जाने पर कि रैन बसेरों को पहले से ही चलाया जा रहा है, बेंच ने कहा है कि उनके लिए पर्याप्त प्रचार आवश्यक है ताकि यह सुविधा वास्तव में नीचे तक पहुंच सकें या जरूरी लोगों तक पहुंच पाएं।

पीठ ने कहा कि

"हालांकि यह बताया गया है कि लोग रैन बसेरों का उपयोग कर सकते हैं, परंतु उन रैन बसेरों के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। इसलिए, सरकार और निगम को निर्देशित किया जाता है कि वे मीडिया के माध्यम से रैन बसेरों की उपलब्धता के बारे में उन लोगों को सूचित करें जो जो बिना किसी आश्रय के परेशान हो रहे हैं।''

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