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COVID19: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन को स्वदेशी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
3 April 2020 4:30 AM GMT
COVID19: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन को स्वदेशी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को अंडमान और निकोबार द्वीप के प्रशासन के लिए कई उल्लेखनीय अंतरिम दिशा-निर्देश पारित किए हैं ताकि द्वीपों में COVID 19 को फैलने से रोकना सुनिश्चित किया जा सकें।

मुख्य न्यायाधीश टी.बी.एन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने 27 मार्च, 2020 को एक अधिवक्ता डी.सी कबीर द्वारा लिखे गए एक पत्र पर स्वत संज्ञान लिया है। जिसमें कहा गया था कि अगर जल्द से जल्द तत्काल उपाय नहीं किए गए तो द्वीपों में संक्रमण का संभावित प्रसार हो सकता है।

उपरोक्त के मद्देनजर, स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए 28 मार्च, 2020 को एक निगरानी समिति (एमसी) भी गठित की गई थी। जिसके बाद यूटी प्रशासन ने एक स्टेटस रिपोर्ट दायर की।

बुधवार को, पीठ ने कहा कि भले ही वह संकट से निपटने के लिए प्रशासन के प्रयासों से संतुष्ट है, लेकिन द्वीप में रहने वाले लोगों की चिंता और पीड़ा को कम करने के लिए '' सख्त जरूरत के समय कार्यपालिका के पूरक और सहायक '' के लिए यह अंतरिम दिशा-निर्देश जारी करने आवश्यक हैं।

पीठ ने कहा कि

''वर्तमान में एक अभूतपूर्व स्थिति है। जो हालांकि अभी तक दिसम्बर 2004 में सर्दियों की सुबह के समय द्वीप पर आई सुनामी से हुई तबाही के साथ तुलनीय तो नहीं है। परंतु हम में से प्रत्येक को चाहे वह कार्यकारी हो, न्यायपालिका या सिविल सोसाइटी ,सभी को इस आपदा को रोकने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा, जो द्वीपों के लिए कयामत का मंत्र या विनाश को रोकने का कारण बन सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि केवल एकजुट होकर प्रयास करना ही इस वायरस के प्रसार के कारण अलग-अलग जगहों से उत्पन्न होने वाली काफी सारी समस्याओं से निपटने में मददगार होगा। अंत तक, हमें अपने साधनों को सुरक्षित करना चाहिए। "

निम्नलिखित निर्देश पारित किए गए हैं-

1) सोशल डिस्टेंसिंग से समझौता नहीं-प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 14 अप्रैल, 2020 तक इसमें कोई चूक न हो।

2) जनता को दवा और आवश्यक सामानों की होम डिलीवरी प्रदान करने के लिए प्रयास जारी रखने चाहिए और दुकानों को सिर्फ उन्हीं इलाकों में खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, जहां डिलीवरी संभव नहीं है।

3) संबंधित अधिकारियों को पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए

4) घरों में रसोई गैस की पहुंच सुनिश्चित की जाए।

5) शहीद द्विप से पेरिशबल्स या जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ का परिवहन तेजी से होना चाहिए, ऐसा न हो कि वे सड़ जाएं।

6) पोर्ट ब्लेयर से दूध और दूध के उत्पाद लाने का काम उचित लोगों या निर्धारित लोगों द्वारा किया जाए।

7) हेलीकाप्टर और शिपिंग सेवाओं का उपयोग केवल आवश्यक सेवाओं के लिए किया जाना चाहिए

8) फ्रंटलाइन पर काम करने वाले लोगों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण की आपूर्ति की जाए।

9) अस्पतालों, नर्सिंग होम आदि में स्वच्छता का ध्यान रखा जाए।

10) कर्मचारियों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए और उपचारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए

11) वरिष्ठ नागरिकों की देख-रेख के लिए पर्याप्त देखभाल या सेवा की जानी चाहिए।

12) यह सुनिश्चित किया जाए कि जरावा, ओनगेस, शम्पेन्स और इसी तरह के कमजोर स्थानीय स्वदेशी समुदायों के बीच वायरस का कोई प्रसार न हो।

13) स्थानीय अधिकारी कचरे और कचरे को साफ करने की आवश्यकता को अनदेखा न करें।

14) नियमित अंतराल पर सार्वजनिक स्थानों की पर्याप्त सफाई या सैनिटाईजेशन किया जाए।

15) बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रतिबंधित पहुंच के साथ खुला रखा जाना चाहिए।

16) बिना किसी परेशानी के इंटरनेट का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस बात का ध्यान रखा जाए कि इंटरनेट तक पहुंच जीवन के अधिकार का एक पहलू है।

17) पुलिस द्वारा मानवीय दृष्टिकोण अपनाया लाए। भले ही वे जनता के साथ व्यवहार करते समय तनावग्रस्त रहते हों।

18) पोर्ट ब्लेयर में सैकड़ों प्रवासी कामगारों की पर्याप्त देखभाल की जाए,उन्हें अस्थायी आश्रय घरों में रखा जाए और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए प्रावधान किए जाएं।

19) केंद्र को इस बीमारी या भुखमरी के कारण द्वीपों में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए अपना पूरा सहयोग देना चाहिए।

इसके अलावा खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया है कि द्वीपवासियों को दी गई राहत और सेवाओं की स्थिति पर एक रिपोर्ट 7 अप्रैल, 2020 तक रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से पीठ को भेज दी जाए।

याचिकाकर्ता के रूप में वकील डी.सी. कबीर पेश हुए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए.एन.एस नाडकर्णी भारत संघ और संघ शासित प्रदेश के प्रशासन के लिए पेश हुए। उनके साथ एडवोकेट जी इंदिरा, के.वी. जगदीश्वरन व संतोष और श्री एस.के.के.डे सचिव, (कानून) यूटी प्रशासन भी पेश हुए थे।




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