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COVID-19:कुर्क या जब्त संपत्तियों से बेदखल करने या उन्हेंं नीलामी से रोकने के लिए सामान्य निर्देश जारी करें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमसीजीएम को दिया सुझाव

LiveLaw News Network
20 March 2020 6:24 AM GMT
COVID-19:कुर्क या जब्त संपत्तियों से बेदखल करने या उन्हेंं नीलामी से रोकने के लिए सामान्य निर्देश जारी करें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमसीजीएम को दिया सुझाव
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को ग्रेटर मुंबई के नगर निगम के आयुक्त और महाराष्ट्र राज्य के नगर निगमों के आयुक्तों को कोरोना वायरस की महामारी के आलोक में सुझाव दिया है कि वह जब्त संपत्तियों को ध्वस्त नहीं करने, बेदखल करने या नीलाम नहीं करने के लिए एक सामान्य निर्देश जारी करने पर विचार करें।

न्यायमूर्ति एस.जे कथावाला और न्यायमूर्ति आर.आई चागला की खंडपीठ ने ए-1 फतेह सीएचएसएल द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उस ढांचे के विध्वंस या ध्वस्त करने पर 31 मार्च तक रोक लगा दी है,जिसका उल्लेख याचिका में किया गया था। साथ ही निगम को कहा है कि निर्दिष्ट अवधि के लिए ऐसे निर्देश जारी करने पर विचार करें। यह भी कहा गया है या चेताया गया है कि यदि कुछ असाधारण मामलों में निगम को जरूरी कारणों के कारण संपत्तियों को गिराने या नीलामी करने की आवश्यकता होती है, तो वह उपयुक्त अदालतों में जाने और आवश्यक आदेश प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल कनाडे पेश हुए।

उक्त विध्वंस पर रोक लगाने के बाद, कोर्ट ने कहा कि वैश्विक महामारी - कोरोना वायरस ( COVID-19) द्वारा निर्मित वर्तमान स्थिति को देखते हुए, न्यायालय केवल आवश्यक मामलों पर दोपहर 12.00 बजे से अपराह्न 2.00 बजे के बीच की सुनवाई कर रही हैं।

पीठ ने कहा कि-

''न्यायालय यह सुनिश्चित करने की भी कोशिश कर रहे हैं कि इन दो घंटों के दौरान भी कोर्टरूम में अधिक भीड़भाड़ न हो और केवल ऐसे व्यक्ति को ही कोर्टरूम में आने की अनुमति दी जाए,जिनकी उपस्थिति उनके संबंधित मामलों में पूरी तरह से आवश्यक है। अधिकांश तात्कालिक मामले नगर निगमों को विध्वंस से रोकने, बेदखल करने और संलग्न या जब्त संपत्तियों की नीलामी करने से रोकने के लिए आदेश देने से संबंधित हैं।''

इस प्रकार, एमसीजीएम के साथ राज्य के नागरिक निकायों को उक्त सुझाव दिया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि इस आदेश की प्रति सभी निगमों के नगर आयुक्तों के पास पहुंच जाएं या वह खुद पहुंचा दें।

सप्ताह की शुरूआत में, आरबीआई द्वारा प्रस्तावित यस बैंक की पुनर्गठन योजना को बॉन्ड धारकों की तरफ से चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस कथावाला के कोर्ट रूम में काफी भीड़ हो गई थी और इतना ही नहीं निचली अदालतों में भी कोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह भीड़ देखी गई थी।

पिछले कुछ सप्ताहों में, हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी पर व्यापक सार्वजनिक चिंता के बीच न्यूनतम मानवीय संपर्क सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

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