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COVID 19 : मामले के ज़रूरी नहीं होने के बावजूद सुनवाई के लिए अदालत में लाने पर याचिकाकर्ता पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 25 हज़ार का जुर्माना

LiveLaw News Network
27 March 2020 10:29 AM GMT
COVID 19 : मामले के ज़रूरी नहीं होने के बावजूद सुनवाई के लिए अदालत में लाने पर याचिकाकर्ता पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 25 हज़ार का जुर्माना
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया क्योंकि उसने COVID 19 महामारी पर अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया था। COVID 19 के मद्देनज़र अदालत ने ये निर्देश दिए हैं कि वकील सिर्फ़ बहुत ही ज़रूरी मामले ही सुनवाई के लिए लाएंगे।

न्यायमूर्ति केके ताटेड मै केशवलाल एंड कंपनी की एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें महाराष्ट्र के खाद्य और औषधि विभाग के मंत्री के 20 सितम्बर 2019 के आदेश को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता के वक़ील राहुल मोरे ने कहा कि अन्य याचिकाकर्ताओं की कई अपीलें लंबित हैं और उन पर स्टे दिया गया है।

अदालत ने कहा,

" COVID 19 के फैलने की आशंका और 20 सितम्बर 2019 के आदेश के कारण मैं नहीं मानता कि यह मामला बहुत ज़रूरी है। लेकिन इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने इस मामले को अत्यंत ज़रूरी होने के रूप में सुनवाई के लिए रखा है।"

इस तरह, अदालत ने याचिकाकर्ता पर मुक़दमे की लागत के रूप में ₹25,000 का जुर्माना लगाया और यह राशि रजिस्ट्री में दो महीने के भीतर जमा कराने को कहा और ऐसा नहीं करने पर उससे भू राजस्व के रूप में यह राशि वसूलने को कहा।

न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने 17 मार्च को एक मुक़दमादार पर ₹15,000 का जुर्माना लगाया था, क्योंकि उसने हाईकोर्ट के मना करने के बाद भी नियमित अवमानना के मामले को अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए रखा।

याचिकाकर्ता के वक़ील ने पीठ को बताया था कि सुनवाई पर ज़ोर नहीं दिए जाने की हिदायत के बावजूद याचिकाकर्ता अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। इस पर अदालत ने कहा, "यह कोई उत्तर नहीं है। एडवोकेट से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह अपने मुवक्किल को यह बताए कि किस बात की इजाज़त है और किस बात की नहीं, और उनकी हर इच्छा के अनुसार वह काम करे यह ज़रूरी नहीं है।"




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