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COVID-19 :असंगठित क्षेत्र के लोगों को खाद्य आपूर्ति लेने के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में जाने के लिए कहना सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन कर सकता है : मद्रास हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
5 April 2020 4:00 AM GMT
COVID-19 :असंगठित क्षेत्र के लोगों को  खाद्य आपूर्ति लेने के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में जाने के लिए कहना सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन कर सकता है : मद्रास हाईकोर्ट
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मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को संबंधित राज्य प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे उस श्रेणी के लोगों को भी आवश्यक खाद्यान्नों के पैकेट वितरित करें जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। यह वितरण उसी काउंटर से किया जाए जिसके माध्यम से नागरिक आपूर्ति विभाग राशन कार्ड वाले व्यक्तियों को खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति डॉक्टर विनीत कोठारी और न्यायमूर्ति आर.सुरेश कुमार की पीठ ने कहा कि

"जिन व्यक्तियों के पास राशन कार्ड नहीं है, उनको COVID-19 महामारी के समय में अपना खाद्यान्न लेने के जिला कलेक्टर कार्यालय जाने के लिए कहना बहुत की असुविधाजनक साबित होगा। वहीं इससे सामाजिक दूरी के मानदंडों का उल्लंघन या भंग होने का खतरा भी बना रहेगा क्योंकि उनके लिए कोई तय समय निर्धारित नहीं हैं।''

इस मामले में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किसी भी अन्य पहचान पत्र के आधार पर राशन कार्ड न रखने वाले परिवारों और तमिलनाडु राज्य के अंदर असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों के सदस्यों , सामुदायिक ड्राइवरों व निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को खाद्यान्न का वितरण किया जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया गया है।

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार ने पहले ही इस श्रेणी के व्यक्तियों को एक ही बार में 15 किलोग्राम चावल, 1 किलोग्राम दाल और 1 किलो खाद्य तेल के वितरण का प्रावधान कर दिया था। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो राज्य के निवासी हैं लेकिन उनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। हालाँकि, उन्होंने बताया किया कि इन वस्तुओं की आपूर्ति संबंधित जिला कलेक्टर के कार्यालय के माध्यम से की जानी है।

जिला कलेक्टर के कार्यालय में सभी तरह से लोगों को बुलाने के पहलू पर स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पीठ ने आदेश दिया है कि-

"हम निर्देश देते हैं कि राज्य को ऐसे व्यक्तियों को आवश्यक खाद्यान्न के इन पैकेटों का वितरण उसी वितरण काउंटर या केंद्रों पर करना चाहिए, जिसके माध्यम से नागरिक आपूर्ति विभाग राशन कार्ड रखने वाले व्यक्तियों को खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है। यह सभी केंद्र इन व्यक्तियों के लिए एक अलग रिकॉर्ड बना सकते हैं। जिसे प्रतिदिन संबंधित जिला कलेक्टर के कार्यालय भेजा जा सकता है ताकि इस अवधि के दौरान इस श्रेणी के किसी भी व्यक्ति को दोहरी आपूर्ति करने से बचा जा सकें।''

इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट 9 अप्रैल को दायर की जानी है।

मामले का विवरण-

केस का शीर्षक- पी. अरुलारसु बनाम तमिलनाडु राज्य व अन्य।

केस नंबर-डब्ल्यू.पी नंबर-7423/2020

कोरम- न्यायमूर्ति डॉक्टर विनीत कोठारी और न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार

प्रतिनिधित्व-याचिकाकर्ता व्यक्तिग तौर पर पेश हुआ,अतिरिक्त महाधिवक्ता पी.एच अरविंद पांडियन (राज्य के लिए)




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