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CJAR,वकीलों ने दिल्ली दंगों के केस की सुनवाई के बीच जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर की निंदा की

LiveLaw News Network
1 March 2020 12:14 PM GMT
CJAR,वकीलों ने दिल्ली दंगों के केस की सुनवाई के बीच जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर की निंदा की
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द कैंपेन फोर जुडिशियल अकाउंटिबिलिटी (CJAR) ने दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति एस मुरलीधर के स्थानांतरण की निंदा की है। CJAR ने इस संबंध में निम्नलिखित बयान जारी किया।

"इस स्थानांतरण का" जनहित से कोई सरोकार नहीं है और यह सब कुछ अपने संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने वाले एक ईमानदार और साहसी न्यायिक अधिकारी को दंडित करने के लिए किया गया है।

हम पूरी तरह से संज्ञान में हैं कि 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा न्यायमूर्ति मुरलीधर के स्थानांतरण की सिफारिश की गई थी, लेकिन जिस तरीके से केंद्र सरकार द्वारा जल्दबाज़ी में अधिसूचना जारी की गई है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह तथ्य कि उनके स्थानांतरण की अधिसूचना शाम को जारी की गई थी, उन्होंने दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े किये और सत्ताधारी पार्टी की दिल्ली दंगों में जानमाल के नुकसान के लिए केंद्र सरकार जवाबदेह बताई थी, ये बातें हमें उनके स्थानांतरण की सही प्रकृति बताती हैं।

न्यायमूर्ति मुरलीधर ने केंद्र सरकार के मौजूदा मंत्रियों, विधायकों और अन्य उच्च अधिकारियों के आचरण के बारे में कड़े सवाल उठाए थे, जिससे लगता है कि यह कदम इन्हीं बातों से प्रभावित होकर उठाया गया है।

जहां पिछले न्यायाधीशों को स्थानांतरित उच्च न्यायालयों में जाने के लिए उचित समय दिया गया है, वहीं न्यायमूर्ति मुरलीधर का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से हुआ और ऐसा करना दंडात्मक प्रकृति पर प्रकाश डालता है। यदि यह वास्तव में न्यायाधीश की सहमति से स्थानांतरण था, तो इस कदम को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विचार करने का कोई तत्व नहीं दिया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने संवाददाताओं को बताया कि स्थानांतरण नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन जिस तरह से और जिस तरीके से स्थानांतरण किया जाता है, वह बिलकुल गलत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने लाइव लॉ को बताया कि अनुशंसा पर तेजी से कार्रवाई की गई और हर्ष मंडेर के मामले में कल सुनवाई के बाद ही स्ठानांतरण को अधिसूचित किया गया। हालांकि यह तकनीकी रूप से सही है कि सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश पर कार्रवाई की, लेकिन यह दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली हिंसा पर सुनवाई के बाद हुआ, जिससे सरकार की कार्रवाई पर संदेह है।

अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने कहा है कि न्यायमूर्ति मुरलीधर को दिल्ली उच्च न्यायालय से हटाने का लगातार प्रयास किया गया है जो दिल्ली उच्च न्यायालय और बार के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि हमने एक अच्छा न्यायाधीश खो ​​दिया है।

उन्होंने कहा कि

"यह बहुत सारे सवाल उठाता है। सरकार कॉलेजियम की सिफारिश के पीछे छिप नहीं सकती। कोई कारण नहीं है कि उन्हें इस मोड़ पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए, सिवाय इसके कि उसे किसी अन्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किया जा रहा है।"

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