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केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से जस्टिस मुरलीधर का स्थानांतरण करने की अधिसूचना जारी की

LiveLaw News Network
26 Feb 2020 6:33 PM GMT
केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से जस्टिस मुरलीधर का स्थानांतरण करने की अधिसूचना जारी की
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केंद्र ने बुधवार को न्यायमूर्ति डॉक्टर एस मुरलीधर को दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी की है। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 12 फरवरी को उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी।

न्यायमूर्ति मुरलीधर दिल्ली उच्च न्यायालय के तीसरे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।

विशेष रूप से दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर न्यायमूर्ति मुरलीधर ने दिल्ली दंगों के मामलों में महत्वपूर्ण आदेश पारित किए थे।

25 फरवरी को रात 12.30 बजे उनके निवास पर आधी रात को सुनवाई हुई, जिसमें जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की एक बेंच ने पुलिस को निर्देश जारी किया कि वे दंगा प्रभावित मुस्तफाबाद में अल हिंद अस्पताल में फंसे मरीजों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें और उन्हें बेहतर सुविधाओं वाले अन्य अस्पतालों में ले जाएं।

बेंच ने आदेश पारित किया कि

"इस स्तर पर न्यायालय मुख्य रूप से घायलों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ जुड़ा है और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करनी है, जिसके लिए उस उद्देश्य के लिए निकटतम उपलब्ध सरकारी अस्पतालों में घायल पीड़ितों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करना है।

तदनुसार कोर्ट दिल्ली पुलिस को निर्देश देती है कि वह इस आदेश के आधार पर सभी संसाधनों को तैनात करके ऐसे सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करे और यह भी सुनिश्चित करे कि सुरक्षित मार्ग के अलावा, घायल पीड़ितों को तत्काल आपातकालीन उपचार मिले, यदि जीटीबी अस्पताल में नहीं तो LNJP अस्पताल या मौलाना आज़ाद या कोई अन्य सरकारी अस्पताल में।"

बाद में दिन में,न्यायमूर्ति मुरलीधर ने न्यायमूर्ति तलवंत सिंह के साथ एक पीठ का नेतृत्व किया, जिसने अनुराग ठाकुर, प्रवीण वर्मा, अभय वर्मा और कपिल मिश्रा जैसे नेताओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण के लिए एफआईआर दर्ज करने के संबंध में दिल्ली पुलिस को एक दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

दिल्ली पुलिस के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के कड़े विरोध के बावजूद, कार्यकर्ता हर्ष मंदेर द्वारा दायर जनहित याचिका में यह आदेश पारित किया गया था।

न्यायमूर्ति मुरलीधर ने सितंबर 1984 में चेन्नई में अपनी कानून प्रैक्टिस शुरू की। वह 1987 में उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हो गए। उन्हें 2006 में दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

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