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(दावों का त्याग) सीपीसी के आदेश 2 नियम 2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
8 Feb 2020 5:04 AM GMT
(दावों का त्याग) सीपीसी के आदेश 2 नियम 2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता:  सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश- 2 नियम-2 से संबंधित प्रतिबंध रिट याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता।

कोर्ट उस रिट याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया था कि क्या पेंशन के निर्धारण के लिए क्वालिफाइंग सर्विस की गणना करते वक्त सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस कमिटी रूल्स 2000 लागू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट विधिक सहयोग समिति और सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में सेवा दे चुके याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को शामिल किया जा सकता है?

इस मामले के याचिकाकर्ताओं ने पहले एक रिट याचिका दायर की हुई थी जिसमें सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ सहित सभी लाभ मंजूर करने का सामान्य दावा किया गया था। इसलिए तर्क यह दिया गया था कि मौजूदा मामले में दी गई दलील पूर्व की रिट याचिका में दी जानी चाहिए थी और, दरअसल , यह दलील दी गई थी, लेकिन अंतत: कोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया था, इसलिए वे दूसरी याचिका नहीं दायर कर सकते।

इस पहलू पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा कि

"हालांकि यह सही है कि रिट याचिका में नियम छह के तहत सेवानिवृत्ति लाभ सहित सभी लाभ मंजूर करने का सामान्य दावा किया गया था, लेकिन ऐसा लगता है कि कोर्ट ने इस बारे में ठीक से विचार नहीं किया। दलील की मनाही नहीं है और जहां तक हमारा सुविचारित मत है कि यह याचिका सुनने योग्य है और इसे बहुत अधिक तकनीकी आधार पर खारिज नहीं की जा सकती।"

कोर्ट ने 'देवेंद्र प्रताप नारायण राय शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य' के मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया, जिसमें निम्नलिखित टिप्पणियां की गई थी

"हाईकोर्ट ने नागरिक प्रक्रिया संहिता के जिस आदेश-2 नियम-2 में जारी प्रतिबंधों पर भरोसा किया, वह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च प्राथमिकता वाली याचिकाओं पर लागू नहीं हो सकता है, लेकिन उच्च न्यायालय ने मुकदमे की तारीख से पहले वेतन के लिए अपीलार्थी के दावे को खारिज कर दिया था, हम यह नहीं मानते कि हाईकोर्ट के विशेषाधिकार के इस्तेमाल में हस्तक्षेप करना कोई सही निर्णय होगा।"

कोर्ट ने कहा कि 'गुलाबचंद छोटा लाल पारिक बनाम गुजरात सरकार' के मामले में भी यही मत अपनाया गया था। इसलिए इसने याचिका मंजूर कर ली तथा यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट विधिक सहायता सेवा समिति और सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में दी गयी उनकी सेवा पेंशन के लिए क्वालीफाइंग सर्विस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा तथा सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ की गणना के लिए इस पर विचार किया जाएगा।

केस का नाम : ब्रह्मा सिंह बनाम भारत सरकार

केस नं: - रिट याचिका (सिविल) 59/2019

कोरम : एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता


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