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किसी व्यक्ति को भद्दी गालियाँ देना आपराधिक धमकियों की श्रेणी के तहत अपराध में नहीं आता:सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
29 April 2019 4:35 AM GMT
किसी व्यक्ति को भद्दी गालियाँ देना आपराधिक धमकियों की श्रेणी के तहत अपराध में नहीं आता:सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ किसी व्यक्ति को भद्दी गालियाँ देना आपराधिक रूप से डराने धमकाने की श्रेणी के तहत अपराध नहीं हो सकता।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने विक्रम जौहर नामक व्यक्ति की अपील पर ग़ौर करते हुए यह बात कही जिसने आपराधिक मामले में ख़ुद की रिहाई की याचिका निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा ख़ारिज किए जाने के ख़िलाफ़ है।

शिकायत यह थी कि जौहर ने दो-तीन अज्ञात लोगों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के घर आए और उसको भद्दी गालियाँ दी और उसपर हमला करने की कोशिश की। जब कुछ पड़ोसी वहाँ पहुँचे तब ये लोग वहाँ से भाग गए। इन लोगों में से एक के हाथ में रिवाल्वर भी था।

आरोपी का कहना था कि एक सर्वेक्षक के रूप में उसने कंपनी के ख़िलाफ़ अग्निशमन के बारे में प्रतिकूल रिपोर्ट दिया था और इसी का बदला लेने के लिए उसके ख़िलाफ़ यह मामला अदायर किया गया था। यह कहा गया कि शिकायत को देखते हुए धारा 504 और 506 के तहत यह शिकायत नहीं बनती है।

पीठ ने कहा कि रिहाई की माँग वाली अपील पर ग़ौर करते हुए अदालत को यह देखना होगा कि जो मामला बनाया गया है उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस बारे में फ़ीओना श्रीखंडे बनाम महाराष्ट्र राज्य और मानिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य मामले में आए फ़ैसले का भी ज़िक्र किया। पीठ ने रतनलाल & धीरजलाल ऑन क्राइम्ज़, के 27वें संस्करण में धारा 506 के तहत अपराध क्या हो सकता है इसको उद्धृत करते हुए कहा कि अभियोजन को यह सिद्ध करना होगा कि :

(i) आरोपी ने किसी व्यक्ति को धमकी दिया

(ii) इस तरह की धमकी के दौरान उस व्यक्ति, उसकी प्रतिष्ठा या उसकी सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाया गया है जिसमें उसकी दिलचस्पी थी;

(iii) इस व्यक्ति ने ऐसा उस व्यक्ति को धमकाने के लिए किया; उस व्यक्ति से ऐसे काम कराना चाहता था जो क़ानूनन वह नहीं कर सकता।


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