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हिंसा रुकने पर CAA पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे : मुख्य न्यायाधीश बोबडे

LiveLaw News Network
9 Jan 2020 7:13 AM GMT
हिंसा रुकने पर CAA पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे : मुख्य न्यायाधीश बोबडे
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबड़े ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रव्यापी हिंसा रुकने के बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

यह टिप्पणी तब आई जब एडवोकेट विनीत ढांडा की CJI की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष विवादास्पद कानून को संवैधानिक घोषित करने की मांग वाली याचिका का उल्लेख किया गया।

"बहुत हिंसा हुई है", पीठ ने टिप्पणी की, जिसमें जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। पीठ ने कहा, "राष्ट्र कठिन समय का सामना कर रहा है ... शांति लाने का प्रयास होना चाहिए।

पुनीत कौर ढांडा द्वारा दायर याचिका में नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और विज्ञापन के अन्य माध्यमों से बड़े पैमाने पर प्रचार करने के लिए एक दिशा-निर्देश की मांग की गई है और स्पष्ट किया है कि यह भारत के संविधान की भावना के खिलाफ नहीं है और किसी भी अर्थ में भारत के नागरिकों के खिलाफ नहीं है।

याचिका में भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग भी की गई है कि वह अधिनियम के नाम पर देश में गलत अफवाहें और हिंसा फैलाने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ पहचान करे और कड़ी कार्रवाई करे।

इस याचिका में राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्यों में आक्रामक तरीके से सीएए को लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

18 दिसंबर को, अदालत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम प्रवासी जो, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर गए थे, उन्हें नागरिकता के लिए शर्तों में छूट देने के लिए पारित अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली लगभग 60 याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने केंद्र से जनवरी के दूसरे सप्ताह तक अपना जवाब देने को कहा था।

देश सीएए के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। यूपी, असम और कर्नाटक राज्यों में पुलिस की गोलीबारी के कारण लगभग 25 लोगों की कथित रूप से मौत हो गई है। विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ जेएमयू, एएमयू आदि विश्वविद्यालयों में पुलिस हिंसा के आरोप हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को AMU में पुलिस हिंसा की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को निर्देश दिया था।

सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान यूपी में पुलिस की ज्यादती की शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मुकदमा दायर किया है।

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