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इस बात की क्या गारंटी है कि आप भागेंगे नहीं' : सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को AGR भुगतान के लिए समय सीमा देनी अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा 

LiveLaw News Network
21 July 2020 3:58 AM GMT
इस बात की क्या गारंटी है कि आप भागेंगे नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को AGR भुगतान के लिए समय सीमा देनी अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा 
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दूरसंचार विभाग (DoT) की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें दूरसंचार कंपनियों को 20 साल की समय सीमा में AGR बकाया का भुगतान करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अक्टूबर 2019 में शीर्ष अदालत द्वारा पारित निर्णय के आलोक में AGR के पुनर्मूल्यांकन / पुनः गणना के लिए किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं करेंगे।

साथ ही आर कॉम, सिस्तेमा, श्याम टेलीसर्विसेज और वीडियोकॉन को 7 दिनों के भीतर अपनी दिवालापन की जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि देनदारियों से बचने के लिए कंपनियों द्वारा IBC का दुरुपयोग नहीं किया जा रहा है।

सभी पक्षों को सार्वजनिक राजस्व से संबंधित भुगतानों के बारे में बताने के लिए चेतावनी देते हुए, जैसा कि न्यायालय द्वारा पहले ही निर्देशित किया गया था, जस्टिस अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने बकाया राशि के भुगतान को लंबित रखने के संबंध में आरक्षण व्यक्त किया।

जस्टिस मिश्रा ने पूछा,

"क्या गारंटी है कि आप भागेंगे नहीं? आप में से कुछ विदेशी कंपनियां हैं और यहां तक ​​कि परिसमापन में जा सकती हैं। सुरक्षा क्या है जो आप हमें दे सकते हैं?"

वोडाफोन आइडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल को 2006 के बाद से भारत में परिचालन के दौरान नुकसान हुआ है।

रोहतगी: कई कॉलम लाभ और हानि का संकेत देते हैं। माई लॉर्ड ध्यान दें कि 2010-11 का राजस्व 43000 करोड़ है जबकि व्यय 36000 करोड़ है। हलफनामे की तालिका में उल्लेखित अन्य खर्च भी हैं। पहले वर्ष में 2857 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ।

जस्टिस मिश्रा ने अक्टूबर 2019 से AGR भुगतान न करने के कारण सभी दूरसंचार कंपनियों की खिंचाई की, जिसमें कहा गया कि किसी भी टेलीकॉम कंपनी को उनकी देनदारियों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सॉलिसिटर जनरल को बकाए के पुनर्मूल्यांकन के लिए वकालत नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसका मतलब कोर्ट के आदेशों के खिलाफ जाना होगा, जिसमें अपेक्षित प्रमुखों के संदर्भ में AGR के बकाए का भुगतान अनिवार्य है।

जस्टिस मिश्रा: इससे बाहर निकलने की कोशिश मत करो। इसे देश में कभी अनुमति नहीं दी जा सकती। यह देश आप लोगों के कारण भुगत रहा है।

इसके प्रकाश में, पीठ ने सभी दूरसंचार कंपनियों के वकीलों से पूछा कि अपेक्षित भुगतान करने के लिए उनके लिए आदर्श और उचित समय क्या होगा। उन पंक्तियों पर, पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि अब वह इस मामले को 10 अगस्त, 2020 को सुनेगा।

दरअसल 18 जून को, सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को उस अर्जी पर वित्तीय दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें दूरसंचार विभाग द्वारा AGR से संबंधित बकाया का निपटान करने के लिए टेलीकॉम कंपनियोंमको 20 साल की समय सीमा की अनुमति मांगी थी।

11 जून को पीठ ने दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया था कि दूरसंचार कंपनियों के AGR बकाए से संबंधित मामले में अक्टूबर 2019 के फैसले के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर उठाए गए दावों पर पुनर्विचार करें।

पीठ ने यह भी कहा कि AGR फैसले के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से मांग गैर जरूरी थी। पीठ ने कहा कि टेलीकॉम और PSU के लाइसेंस अलग-अलग प्रकृति के हैं क्योंकि PSU का व्यावसायिक शोषण करने का इरादा नहीं था।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने PSU से मांगों पर गौर किया,

"यह हमारे फैसले का दुरुपयोग है। आप 4 लाख करोड़ से अधिक की मांग कर रहे हैं! यह पूरी तरह से अक्षम्य है।"

मार्च में, कोरोनावायरस के चलते लॉकडाउन के शुरू होने से पहले, दूरसंचार विभाग (DoT) ने AGR बकाया का निर्वहन करने के लिए दूरसंचार कंपनियों के लिए 20 साल से अधिक तक भुगतान पर रोक लगाने का प्रस्ताव करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से पिछले बकाया की वसूली के लिए एक फार्मूले पर आने वाले 24 अक्टूबर, 2019 के आदेश में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

अपील में, संघ ने कहा था कि भले ही अदालत ने समायोजित सकल राजस्व (AGR) की परिभाषा को विस्तृत कर दिया हो, इससे तीन टेलीकॉम यानी वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज को सामूहिक रूप से अतिरिक्त लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC), दंड और ब्याज के 1.02 लाख करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी का सामना करना पड़ रहा है।यह जरूरी है कि वसूली के लिए मोड के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाए।

हालांकि, 18 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में शीर्ष अदालत द्वारा तय किए गए समायोजित सकल राजस्व (AGR) के स्व-मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन करने के लिए केंद्र और दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई थी।

अप्रैल में, सर्वोच्च न्यायालय ने वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज द्वारा 24 अक्टूबर के फैसले पर पुनर्विचार करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें समायोजित सकल राजस्व ( AGR ) की परिभाषा को विस्तृत किया गया था।

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