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"हम हैरान हैं कि 'पूजा' नीलाम हो गई है": सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के कालकाजी मंदिर में प्राप्त दान के संबंध में कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति के आदेश की प्रशंसा की

LiveLaw News Network
23 Feb 2021 4:00 AM GMT
हम हैरान हैं कि पूजा नीलाम हो गई है: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट  के कालकाजी मंदिर में प्राप्त दान के संबंध में कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति के आदेश की प्रशंसा की
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सुप्रीम कोर्ट ने (सोमवार) दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया आदेश की सराहना की, जिसमें दिल्ली के अत्यधिक पूजनीय कालकाजी मंदिर में प्राप्त दान के संबंध में कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने का आदेश दिया गया था।

न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह के 5 फरवरी के आदेश को इस आशय की अपील सुनकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, "यह न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह द्वारा एक बहुत अच्छा आदेश है। यह कड़ी कार्रवाई है, ऐसे स्थानों पर ऐसा निर्णय लिए जाने की आवश्यक है।"

"दान पेटी में पैसे डालने वाले भक्तों को पता नहीं चलता कि क्या हो रहा है? पुजारी होने का अधिकार नीलाम हो जाता है। इस पैसे को इकट्ठा करने के अधिकार हैं।" आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोर्ट कमिश्नर ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया था, तब दान पेटियों का सफाया कर दिया गया था।

यह ध्यान दिया जा सकता है कि वर्तमान मामले में विवाद कालकाजी मंदिर के लिए चिंता का विषय है, जिसमें विभिन्न गुटों ने पूजा-पाठ, प्रसाद में हिस्सेदारी और तेह-बज़ारी अधिकारों सहित अन्य चल / अचल संपत्तियों में नीलामी का दावा किया है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि,

"यह पूजा करने के अधिकार की लड़ाई नहीं है, बल्कि पैसे की लड़ाई है।"

जस्टिस शाह ने कहा कि,

"हम हैरान हैं कि 'पूजा' नीलाम हो गई है। हम इस याचिका से चिंतित नहीं हैं, हम धार्मिक भावनाओं से चिंतित हैं। यह एक सही आदेश है।"

जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि,

"जो गूज (Goose) के लिए क्या अच्छा है, वही गैंडर (Gander) के लिए अच्छा है।"

पक्षकारे द्वारा किए गए दावों के मद्देनजर, मंदिर में प्रचलित स्थिति का पता लगाने के लिए, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिंह द्वारा कालकाजी मंदिर का दौरा करने के लिए एक स्थानीय आयुक्त की नियुक्ति की गई थी। स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट के एक खंड में दिखाया गया है कि कालकाजी मंदिर एक गुट के नियंत्रण में आ चुका है, जो इसे एक वाणिज्यिक उद्यम की तरह चला रहे हैं।

न्यायाधीश ने देखा कि,

"यह काफी निराशाजनक है कि एक मंदिर में पूजा करने के अधिकार को नीलाम किया जा रहा है और तीसरा पक्ष पूजा समारोहों का आयोजन कर रहा है। विभिन्न प्रकार के होर्डिंग्स हैं जिसमें कालकाजी मंदिर के पास लगाए गए हैं और व्यवसायों के वाणिज्यिक विज्ञापनों में लगाया गया है। उदाहरण के लिए, एम/एस आनंद ट्रेडर्स एंड कंपनी, जे एंड जे बिल्डकॉन आदि को भी दिखाया गया है। इन व्यवसायों की प्रकृति और उन्हें कौन चला रहा है, यह ज्ञात नहीं है। होर्डिंग्स अत्यंत प्रमुख हैं और एक होर्डिंग मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगाया गया है।

यह भी नोट किया गया कि स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट भी स्पष्ट रूप से दिखाती है कि लगभग 10,000 विजीटर्स सप्ताह के काम के दिनों में मंदिर आते हैं और सप्ताहांत (Weekends) में लगभग 20,000 विजीटर्स आते हैं। उक्त रिपोर्ट के दान पेटियों की तस्वीरों से यह भी पता चला है कि कुछ दान पेटियां खाली हैं और कुछ दान पेटियों में कुछ नकदी है जो वहां गिरी पड़ी हैं। स्थानीय आयुक्त के अनुसार, मंदिर में कुल 38 से अधिक दान पेटी हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि इन दान पेटियों को कौन नियंत्रित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रतिवादी विशाल भारद्वाज ने स्थानीय आयुक्त को सूचित किया था कि उनको 24 जनवरी 2021 को दान पेटी संभालने का दायित्व प्राप्त हुआ था और तब से उनकी कस्टडी में है। न्यायमूर्ति सिंह ने अपीलकर्ता से अनुरोध किया कि वह बीते नौ दिनों के प्रसाद के संग्रह का निरीक्षण करने के लिए भवन के मुख्य कमरे में रखे दस दान पेटियों को खोले। अपीलकर्ता विशाल भारद्वाज ने भवन के मुख्य कक्ष में रखी दान पेटियों को खोला। दान पेटियों में सामान्य रूप से नगण्य प्रसाद था, और एक दान पेटी खाली थी। छोटे आकार के दान पेटियों में नौ दिनों का प्रसाद होता है जो केवल एक-तिहाई भरा हुआ था।

तदनुसार, एकल पीठ ने इसे (डब्लू.ई.एफ) संचालित करने के लिए 6 फरवरी 2021 को निम्नलिखित व्यवस्था का आदेश दिया था:

(a) अब से पूजा का आयोजन डब्लू.ई.एफ, जो 6 फरवरी, 2021 से 24 फरवरी, 2021 का संबंध है, वह अब वादी के अधिकृत उम्मीदवार द्वारा किया जाएगा।

(b) पुजारी कक्ष को प्रतिवादियों द्वारा तत्काल प्रभाव से खाली कराया जाएगा। वादी के बाड़ी के दौरान उक्त नामांकित व्यक्ति द्वारा उक्त कमरे पर कब्जा किया जाएगा।

(C) कोर्ट के रिसीवर की देखरेख में मंदिर के परिसर में और दान पेटियों पर लगे होर्डिंग्स को तुरंत हटा दिया जाए।

(d) सभी दान पेटियों को अब कोर्ट रिसीवर्स द्वारा ताला लगाया जाएगा और चाबियों को उनके पास रखा जाएगा। दान पेटियों की पहचान करने और उन्हें ठीक से करने के उद्देश्य से, स्थानीय आयुक्त रिसीवर की सहायता करेंगे।

(e) दान पेटी को प्रतिदिन केवल एक बार प्राप्तकर्ता द्वारा निर्धारित समय पर या तो देर शाम या सुबह खोला जाएगा।

(f) वादी और प्रतिवादियों के दो प्रतिनिधियों की उपस्थिति में दान पेटी केवल कोर्ट रिसीवर्स के सामने खोली जाएगी। इन पैसों को कोर्ट रिसीवर के निर्देशानुसार गिना जाएगा और 1/6 वां हिस्सा वादी के प्रतिनिधि को सौंप दिया जाएगा। शेष राशि यूसीओ बैंक, दिल्ली उच्च न्यायालय की शाखा में रखे गए रजिस्ट्रार जनरल, दिल्ली उच्च न्यायालय के बैंक खाते में जमा की जाएगी। रिसीवर चढ़ावों की गिनती के लिए तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए स्वतंत्र हैं, और इसके लिए वह किसी भी व्यक्ति की सहायता ले सकते हैं।

(g) 24 फरवरी 2021 तक प्राप्त होने वाले सभी चढ़ावों का पूरा लेखा-जोखा न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।

(h) सभी सीसीटीवी कैमरों को चालू किया जाएगा और सभी फुटेज रिसीवर की कस्टडी में होगा। सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को तकनीशियन द्वारा किसी भी तरह से छेड़छाड़ किए बिना, रोज रिसीवर को सौंप दिया जाएगा।

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