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पीएम को मॉब लिंचिंग के खिलाफ पत्र लिखने वाले प्रख्यात लोगों के खिलाफ हुई एफआईआर कहा, देश की छवि खराब की

LiveLaw News Network
7 Oct 2019 1:46 PM GMT
पीएम को मॉब लिंचिंग  के खिलाफ पत्र लिखने वाले प्रख्यात लोगों के खिलाफ हुई एफआईआर कहा, देश की छवि खराब की
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बिहार पुलिस ने 2 अक्टूबर को कलाकारों और बुद्धिजीवियों के एक समूह के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की, जिन्होंने पिछले जुलाई में प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें देश में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा लोगों को मारने की घटना) की बढ़ती घटनाओं के बारे में शिकायत की गई थी।

पुलिस स्टेशन, मुजफ्फरपुर में दर्ज एफआईआर में नामी फिल्मकार अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन, श्याम बेनेगल, गायक शुभा मुदगल, अभिनेता सौमित्र चटर्जी, कोनोना सेना, रेवती, निर्देशक मणिरत्नम और इतिहासकार रामचंद्र गुहा को आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर में कहा गया "आरोपी व्यक्तियों द्वारा पीएम मोदी को लिखा गया खुला पत्र, भीड़ द्वारा हत्या की बढ़ती घटनाओं पर झूठी चिंताएं पैदा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने के लिए है और पीएम ने पिछले समय मेंं अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश की है लेकिन अभियुक्त व्यक्तियों ने इस तरह का पत्र लिखकर देश और इसकी लोकतांत्रिक संरचना को बदनाम करने की कोशिश की है।

अभियुक्तों ने देश को विभाजित करने का प्रयास करके, देशवासियों को गुमराह करके और घृणा फैलाने के द्वारा देशद्रोह का प्रयास किया है ", आरोप लगाया कि एफआईआर के तहत SBI 124A (राजद्रोह), 153B (राष्ट्रीय एकीकरण के खिलाफ कार्य) , 160 (अभिघात, 290 (सार्वजनिक उपद्रव), 297 (बलवा) और 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान)।

यह एफआईआर अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा दायर एक शिकायत पर आधारित है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत कार्रवाई के लिए भेजा था।

झारखंड के रांची में तबरेज़ अंसारी नामक व्यक्ति की मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद 49 हस्तियों द्वारा ऐसी लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ एक पत्र पिछले जुलाई में पीएम को भेजा गया था। कथित तौर पर अंसारी को भीड़ ने हमले के दौरान 'जय श्री राम' का जाप करने के लिए कहा था।



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