Top
ताजा खबरें

POCSO : फोरेंसिक लैब के लिए संसाधनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया 

LiveLaw News Network
9 Jan 2020 6:41 AM GMT
POCSO : फोरेंसिक लैब के लिए संसाधनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया 
x

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वो बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में तेजी से जांच सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट दाखिल करें।

जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने यह भी कहा कि हर जिले में विशेष सरकारी वकील होने चाहिए, जिनके पास बाल पीड़ितों से निपटने के लिए ज्ञान हो। सभी राज्यों में न्यायिक अकादमियों द्वारा ऐसे अभियोजकों की मदद के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। दरअसल अदालत ने बच्चों के साथ बढ़ती रेप की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्यों को उन जिलों में दो स्पेशल कोर्ट का गठन करना होगा जहां POCSO अधिनियम के तहत बाल शोषण के लंबित मामलों की संख्या 300 से अधिक है।

यह भी स्पष्ट कर दिया था कि POCSO अधिनियम के तहत 100 से अधिक एफआईआर वाले प्रत्येक जिले में एक अदालत स्थापित करने के जुलाई 2019 के दिशानिर्देश से अदालत का मतलब है कि कानून के तहत केवल ऐसे ही मामलों से निपटने के लिए एक विशेष अदालत होनी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने निर्देश तहत ये कहा था कि एक छोटी वीडियो क्लिप, जिसका उद्देश्य बाल दुर्व्यवहार की रोकथाम और बच्चों के खिलाफ अपराधों के अभियोजन के बारे में जागरूकता फैलाना है, हर सिनेमा हॉल में प्रदर्शित की जाना चाहिए और नियमित अंतराल पर विभिन्न टेलीविजन चैनलों द्वारा इसका प्रसारण किया जाना चाहिए।

यह भी निर्देश दिया था कि विशेष अदालत को केंद्र द्वारा फंड दिया जाएगा जो कि पीठासीन अधिकारी, सहायक व्यक्तियों, विशेष सरकारी अभियोजकों, अदालत के कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे की नियुक्ति का ख्याल रखेगा, जिसमें बाल-अनुकूल वातावरण और कमजोर गवाह अदालत कक्ष का निर्माण भी शामिल है।

Next Story