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इस मुद्दे पर एक लाख याचिका दाखिल करने का कोई मतलब नहीं : सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 पर और याचिकाओं पर सुनवाई का इच्छुक नहीं 

LiveLaw News Network
1 Oct 2019 3:01 PM GMT
इस मुद्दे पर एक लाख याचिका दाखिल  करने का कोई मतलब नहीं : सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 पर और याचिकाओं पर सुनवाई का इच्छुक नहीं 
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह साफ कहा है कि वो जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जे को रद्द करने वाले अनुच्छेद 370 में संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली किसी भी अन्य याचिका पर विचार नहीं करेगा।

जस्टिस एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर एक लाख याचिका दायर करने का कोई मतलब नहीं है। पीठ ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को कहा है कि वो 4 हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करें और फिर 1 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता उसका जवाबी हलफनामा दाखिल करेंगे। शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 14 नवंबर तय की है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रतिक्रिया दायर करने के लिए मांगा समय

जब याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य में पाबंदियों को अब 58 दिन हो चुके हैं तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से समय दिए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि 10 याचिकाएं हैं और "प्रत्येक के लिए एक प्रतिक्रिया दायर करनी होगी।"

5 जजों की पीठ ने इसपर कहा, "हमें केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति देनी चाहिए अन्यथा हम इस मामले पर फैसला नहीं कर सकते।"

अनुच्छेद 370 भंग करने से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के केंद्र को निर्देश

संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस एन. वी. रमना के अलावा जस्टिस एस. के. कौल, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस सूर्य कांत शामिल हैं, ने यह स्पष्ट किया कि वो अनुच्छेद 370 को भंग करने के निर्णय से संबंधित प्रत्येक प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए केंद्र को निर्देशित करेगी।

"रिट याचिका का मार्ग लेने और हस्तक्षेप याचिका से पार्टियों को बचना चाहिए"

यह देखते हुए कि इससे पहले दायर याचिकाओं का समूह समान मुद्दों पर दायर है, अदालत ने यह भी कहा कि पार्टियों को रिट याचिका का मार्ग लेने और हस्तक्षेप याचिका से बचना चाहिए। पीठ ने आगे यह स्पष्ट किया कि यह धारा 370 से संबंधित अन्य मुद्दों से निपटने वाली याचिकाओं पर ही सुनवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश ने इस मुद्दे से संबंधित मामलों को संविधान पीठ को किया था संदर्भित

दरअसल सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में लंबित सभी याचिकाओं को जस्टिस एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ को हस्तांतरित कर दिया था। पीठ का गठन विशेष रूप से अनुच्छेद 370 से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ताओं में नेशनल कांफ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी (जो जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं), पूर्व IAS अधिकारी और जम्मू-कश्मीर के राजनेता शाह फैसल, एक्टिविस्ट शेहला राशिद, कश्मीरी वकील शाकिर शबीर, वकील एम एल शर्मा, जेके पीपल्स कॉन्फ्रेंस, सीपीआई (एम) के नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी समेत अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं। कुछ याचिकाओं में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है जिसमें राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है।

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