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आरे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की ठाने मेट्रो लाइन के लिए पेड़ काटने पर 2 हफ्ते के लिए रोक लगाई

LiveLaw News Network
3 Dec 2019 3:15 AM GMT
आरे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की ठाने मेट्रो लाइन के लिए पेड़ काटने पर 2 हफ्ते के लिए रोक लगाई
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दो महीने के भीतर दूसरी बार सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में मेट्रो रेल विकास प्राधिकरण (एमएमआरडी) की परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए दखल दी है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने मेट्रो लाइन 4 (वडाला से ठाणे के लिए) के लिए पेड़ों की कटाई पर दो सप्ताह के लिए रोक लगा दी।

पीठ ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वो एक सप्ताह के भीतर बॉम्बे हाईकोर्ट में संशोधित याचिका दाखिल करे। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए मुंबई के आरे कॉलोनी वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई ना करने का आदेश दिया था।

वकील पूजा धर के माध्यम से ठाणे के निवासी रोहित जोशी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 25 नवंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की कि एमएमआरडी द्वारा निर्माण की जाने वाली मेट्रो 4 लाइन परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक हटा ली थी।

हाईकोर्ट ने अक्टूबर में अलग बेंच द्वारा पारित स्टे को हटा दिया था। नवंबर के फैसले में उच्च न्यायालय ने माना था कि सार्वजनिक परियोजनाएं ठप नहीं हो सकती हैं।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या उसने ट्री अथॉरिटी के फैसले को चुनौती दी है जिसने परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को मंजूरी दे दी। पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह उच्च न्यायालय का रुख करें।

शीर्ष अदालत ने कहा,

"याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील, आज से एक सप्ताह की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष संशोधनों को ले जाने का कार्य करेंगे। उस आश्वासन पर आज से दो सप्ताह की अवधि के लिए पेड़ों की कटाई से संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंधित करने वाली निषेधाज्ञा है।"

याचिकाकर्ता ने कहा कि पेड़ों को काटने के लिए दी गई अनुमति महाराष्ट्र (शहरी क्षेत्रों) के संरक्षण और वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1975 के उल्लंघन में है जिसके तहत स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन द्वारा सार्वजनिक नोटिस की आवश्यकता होती है और याचिकाकर्ता ने कहा, "इस मामले में ऐसी किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।"

याचिकाकर्ता का कहना है कि पेड़ काटने की अनुमति देने से पहले ट्री अथॉरिटी ने किसी भी सार्वजनिक आपत्ति पर विचार नहीं किया। जोशी का दावा है कि हाईकोर्ट ने यह ध्यान नहीं दिया कि मेट्रो परियोजना के निर्माण की तुलना में पारिस्थितिकी के विनाश को रोकना वास्तव में अधिक सार्वजनिक हित है। याचिका में कहा गया है कि 32 किलोमीटर के पूरे कॉरिडोर के माध्यम से एलिवेटेड लाइन से ग्रीन कवर को नुकसान होगा। कास्टिंग यार्ड के निर्माण के लिए मैंग्रोव का विनाश पहले ही शुरू हो चुका है।

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