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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने वाली अर्जी पर फैसला लेने को कहा

LiveLaw News Network
25 Nov 2019 4:11 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने वाली अर्जी पर फैसला लेने को कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वो राजनीतिक दलों को चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को प्रतिबंधित करने वाले प्रतिनिधित्व पर "तर्कपूर्ण आदेश" पारित करे।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर उस जनहित याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया जिसमें मांग की गई थी कि कोई भी राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव में ना उतारे।

पीठ ने कहा, "हम भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता (उपाध्याय) के 22 जनवरी, 2019 के प्रतिनिधित्व पर विचार करें और तीन महीने के भीतर एक यथोचित आदेश पारित करें।"

सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए, इस साल 21 जनवरी को याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह चुनाव आयोग के पास इस मामले को लेकर प्रतिनिधित्व दे।

उपाध्याय ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की, उसे याचिका दायर करने के लिए मजबूर किया और अब शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर यथोचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

उपाध्याय ने चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की थी कि "राजनीतिक दलों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए प्रतिबंधित करें।

याचिका में कहा गया है कि कार्रवाई का कारण 10 अक्टूबर, 2018 को उत्पन्न हुआ था, जब चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए अधिसूचना जारी करते हुए, चुनाव चिह्न आदेश 1968 और आदर्श आचार संहिता में संशोधन नहीं किया था, जिसमें राजनीतिक दलों के आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को शामिल ना करने की बात थी।

भारत में राजनीति का अपराधीकरण बढ़ा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है कि संसद के 24 प्रतिशत सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।" याचिका में कहा गया।

"2009 के चुनावों में लोकसभा के लिए चुने गए 7,810 उम्मीदवारों में से 1,158 या 15 प्रतिशत ने आपराधिक मामलों की घोषणा की, जिनमें से 610 या 8 प्रतिशत मामलों में गंभीर मामले थे। 2014 लोकसभा चुनावों में 8,163 उम्मीदवारों में से 1398 या 17 प्रतिशत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले थे याचिका में कहा गया है कि 889 या 11 प्रतिशत आपराधिक मामले गंभीर थे।

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