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पुर्तगाली कानून का मूल भले ही विदेशी हो, लेकिन यह भारतीय कानूनों का हिस्सा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

LiveLaw News Network
15 Sep 2019 4:16 AM GMT
पुर्तगाली कानून का मूल भले ही विदेशी हो, लेकिन यह भारतीय कानूनों का हिस्सा,  सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि गोअन डोमेसाइल (अधिवास) के सक्सेशन (उत्तराधिकार) एवं इनहेरिटेंस (विरासत) के अधिकार, गोवा राज्य में लागू पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 द्वारा शासित होंगे।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की बेंच ने यह अभिनिर्णित किया कि, यहाँ तक कि गोवा के बाहर, भारत में कहीं भी स्थित गोअन अधिवास की संपत्तियों के संबंध में उत्तराधिकार और विरासत के अधिकार, इसी कोड द्वारा शासित होंगे।

जोस पाउलो कॉटिन्हो बनाम मारिया लुइजा वेलेंटीना परेरा के मामले में शीर्ष अदालत द्वारा विचार किया गया मुद्दा यह था कि क्या भारत में गोवा के बाहर स्थित एक गोअन की संपत्ति का उत्तराधिकार, पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867, जैसा कि गोवा राज्य में लागू है, द्वारा शासित होगा या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 द्वारा।

पुर्तगाली नागरिक संहिता एक भारतीय कानून है

इस मुद्दे का जवाब देते हुए कि क्या पुर्तगाली नागरिक संहिता को विदेशी कानून कहा जा सकता है और निजी अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत लागू होंगे, पीठ ने कहा:

"हमारा यह स्पष्ट मानना है कि ये कानून तब तक लागू नहीं होता जब तक कि भारत सरकार द्वारा इसे मान्यता नहीं प्राप्त होती और पुर्तगाली नागरिक संहिता, भारत की संसद के एक अधिनियम के कारण गोवा में लागू होती रही है। इसलिए, पुर्तगाली कानून, जिसका मूल भले ही विदेशी रहा हो, भारतीय कानूनों का एक हिस्सा बन गया, और, संक्षेप एवं सार में, यह एक भारतीय कानून है। यह अब विदेशी कानून नहीं है। गोवा भारत का एक क्षेत्र है; गोवा के सभी अधिवास भारत के नागरिक हैं; पुर्तगाली नागरिक संहिता, केवल अध्यादेश और अधिनियम के चलते लागू है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि संहिता एक भारतीय कानून है और इस मामले में निजी अंतरराष्ट्रीय कानून के कोई सिद्धांत लागू नहीं होंगे।"

गोवा के बाहर भी गोअन अधिवास, कोड द्वारा शासित होगा

एक अन्य मुद्दा यह था कि क्या गोवा राज्य के बाहर एक गोअन अधिवास की संपत्ति, इस कोड द्वारा या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम द्वारा या व्यक्तिगत कानूनों, जैसा कि देश के बाकी हिस्सों में लागू है, उदाहरण के तौर पर, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन अधिनियम, 1937 आदि, द्वारा शासित होगी|

पीठ ने देखा:

पुर्तगाली नागरिक संहिता एक विशेष अधिनियम होने के नाते, केवल गोवा के अधिवासों पर लागू होती है, और यह गोअन अधिवासियों के ऊपर उन सभी संपत्तियों के संबंध में लागू होगी, चाहे वे भारत में कहीं भी स्थित हों, भले गोवा के भीतर हों या गोवा के बाहर और भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 5 या उत्तराधिकार के नियम, ऐसे गोअन अधिवास पर लागू नहीं होंगे।



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