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पंजीकरण अधिनियम की धारा 32 के तहत बिक्री विेलेख पंजीकरण के दौरान दोनों पक्षों की उपस्थिति जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
27 Jan 2020 3:35 AM GMT
पंजीकरण अधिनियम की धारा 32 के तहत बिक्री विेलेख पंजीकरण के दौरान दोनों पक्षों की उपस्थिति जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 32 के तहत ब्रिकी विलेख के पंजीकरण के दौरान दोनों पक्षों का उपस्थित रहना जरूरी नहीं है।

हालांकि, गौरतलब है कि राज्यों द्वारा बनाये गये नियमों के तहत क्रेता और विक्रेता दोनों की उपस्थिति जरूरी हो सकती है।

इस मामले में, ट्रायल कोर्ट ने वादी द्वारा दायर मुकदमे पर इस आधार पर हुक्मनामा दिया कि बिक्री विलेख के पंजीकरण के समय क्रेता वहां मौजूद नहीं था।

हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि पंजीकरण अधिनियम की संबंधित धाराओं को संयुक्त रूप से पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि जब सब-रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकरण के लिए दस्तावेज पेश किया जाता है तो क्रेता का वहां उपस्थित रहना जरूरी नहीं होता।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने कहा कि बिक्री विलेख के पंजीकरण के वक्त सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में दूसरा प्रतिवादी मौजूद नहीं था।

कोर्ट ने कहा :

"लेकिन कानून के अनुसार, बिक्री विलेख के पंजीकरण के दौरान पंजीकरण कार्यालय में क्रेता की मौजूदगी आवश्यक नहीं थी। बिक्रीनामा पर हस्ताक्षर माडेगौडा ने किया था और इस पहलू पर कोई विवाद नहीं खड़ा किया गया है।

जिस बिक्रीनामा पर सवाल खड़ा किया जा रहा है वह पंजीकरण अधिनियम की धारा 31, 88 और 89 के तहत नहीं आता। इस कानून की धारा 32 कहती है कि बिक्री विलेख पंजीकरण के दौरान दोनों पक्षों का उपस्थित रहना जरूरी नहीं है।"

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