Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

वरिष्ठ नागरिक अधिनियम : केरल हाईकोर्ट ने कहा, अगर ट्रांसफर डीड में गुजारे की राशि देने की बात नहीं है तो भी धारा 23 लागू होगी

LiveLaw News Network
11 Nov 2019 7:58 AM GMT
वरिष्ठ नागरिक अधिनियम : केरल हाईकोर्ट ने कहा, अगर ट्रांसफर डीड में गुजारे की राशि देने की बात नहीं है तो भी धारा 23 लागू होगी
x

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ़ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट की धारा 23 उस स्थिति में भी लागू हो सकती है अगर ट्रांसफर डीड में गुजारे की राशि देने की बात नहीं है।

न्यायमूर्ति इ मुहमद मुश्ताक़ ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की योजना का उद्देश्य किसी प्रस्ताव को नहीं मानने को लेकर नहीं है बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और मां-बाप के कल्याण और उनके हितों को सुरक्षित करने के लिए है. कुर्म पुराण, मनुस्मृति, कुरान और बाइबिल को उद्धृत करते हुए जज ने कहा कि भारतीय समाज के परंपरागत नियम और मूल्य बड़ों की देखभाल के कर्तव्य पर जोर देते हैं। अदालत ने कहा कि शहरीकरण और आजीविका की तलाश के क्षेत्र का भारी विस्तार हो जाने के कारण माँ-बाप को उनकी बढती उम्र और शारीरिक स्थिति के कारण बोझ समझा जाने लगा है।

विरोधात्मक और जिज्ञासु कानूनी व्यवस्था में अंतर अताते हुए अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम में जांच की जो बात सोची गई है वह वैसा ही है जो जिज्ञासु व्यवस्था में है।

अदालत ने कहा,

"इसलिए, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत गठित ट्रिब्यूनल का कर्तव्य है सच का पता लगाना. इसके लिए वह दलीलों और सबूतों की मदद ले सकता है. ट्रिब्यूनल को स्वतंत्र रूप से सच क्या है इसकी जांच करनी पड़ेगी ताकि वरिष्ठ नागरिकों/पेरेंट्स के हितों की रक्षा की जा सके। विरोधात्मक व्यवस्था की तरह किसी विवाद का हल नहीं करता है बल्कि, वह वरिष्ठ नागरिकों/पेरेंट्स के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाता है।

इसलिए इस ध्यान विभिन्न स्तरों पर वरिष्ठ नागरिकों या पेरेंट्स की सुरक्षा के लिए उसके द्वारा लिए गए निर्णयों पर होना चाहिए। इस तरह, क़ानून के मंतव्य को ध्यान में रखते हुए, ...मैं इस बात को स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की योजना का उद्देश्य विवादों का निपटारा नहीं बल्कि ऐसे कदमों को बढ़ावा देना है जिससे वरिष्ठ नागरिकों और पेरेंट्स के कल्याण और उनके हित सुरक्षित किये जा सकें।अधिनियम के तहत जांच की मांग एक तरह से जांच है जिसका उद्देश्य क़ानून के प्रावधानों के अनुरूप वरिष्ठ नागरिकों या पेरेंट्स के हितों की सुरक्षा है।"

विरोधात्मक कानूनी विवाद में दोनों ही पक्षों के अधिकारों और हितों का फैसला किया जाएगा। ट्रिब्यूनल को उन कारकों से निर्देशित होना चाहिए, जिनसे सच का पता लगाकर इस तरह के हितों की रक्षा करना है विरोधात्मक व्यवस्था में ट्रिब्यूनल एक उदासीन अंपायर की तरह काम नहीं कर सकता। इस क़ानून के उद्देश्यों पर गौर करते हुए, ट्रिब्यूनल को जिज्ञासु व्यवस्था की तरह जांच की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए न कि विरोधात्मक कानूनी विवाद की तरह. वरिष्ठ नागरिकों ने जो दलील दी है उसके बावजूद सच जानने के लिए, जैसा कि उसके समक्ष बताया गया है, उसे वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों को दूर करना है।

विरोधात्मक और जिज्ञासु क़ानून व्यवस्था में अंतर को स्पष्ट करते हुए अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम में जिस तरह की जांच का प्रावधान है वह जिज्ञासु व्यवस्था की ही तरह है।


Next Story