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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के स्थानीय निकाय चुनाव को हरी झंडी दिखाई, 9 नए जिलों में चुनाव पर रोक लगाई 

LiveLaw News Network
6 Dec 2019 6:21 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के स्थानीय निकाय चुनाव को हरी झंडी दिखाई, 9 नए जिलों में चुनाव पर रोक लगाई 
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु में स्थानीय निकाय चुनाव को हरी झंडी देते हुए फैसला सुनाया है कि 9 नए बने जिलों को छोड़कर सभी जगह चुनाव होंगे।

अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने 9 नए बने जिलों में निकाय चुनाव पर रोक लगा दी है और कहा कि 9 नए बने जिलों में परिसीमन के बाद चार महीनों के भीतर चुनाव होंगे।

दरअसल  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को डीएमके द्वारा तमिलनाडु के स्थानीय निकाय चुनावों को स्थगित करने की मांग वाली याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जो 27 दिसंबर और 30 दिसंबर को होने वाले हैं। डीएमके ने कहा है कि राज्य में 9 नए जिलों का गठन किया गया है लेकिन इनका परिसीमन नहीं हुआ है।

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी डीएमके की ओर से पेश हुए और अदालत को सूचित किया कि नवगठित जिले की सीमाओं, जनसंख्या प्रोफाइल में बदलाव किया जाना है और इनके नए वार्ड होंगे। इस पर प्रकाश डालते हुए यह आग्रह किया गया कि चूंकि परिसीमन की नियत प्रक्रिया नहीं हुई है इसलिए चुनाव को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए जब तक कि यह पूरा न हो जाए।

इस दौरान पीठ ने पूछा कि क्या पिछले जिले के वार्डों को नए सिरे से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।

CJI ने आगे पूछा कि विभाजन के बाद किस परिसीमन को प्राप्त करने की मांग की गई है और उस की क्या आवश्यकता है। सिंघवी ने यह कहते हुए जवाब दिया कि यह प्रक्रिया का एक हिस्सा है और स्थानीय निकाय चुनावों का ठीक से संचालन करना लोकतंत्र का अभिन्न अंग है।उन्होंने आगे कहा कि चूंकि सरकार ने लंबे समय तक इंतजार किया इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए केवल दो सप्ताह इंतजार करना उचित रहेगा कि पहले प्रक्रिया पालन किया गया है।

CJI बोबडे ने तब चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा पर अपना ध्यान केंद्रित किया और कहा "तमिलनाडु में जिलों के विभाजन के बाद परिसीमन आवश्यक नहीं है?" नरसिम्हा ने नकारात्मक में जवाब दिया और कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं है क्योंकि मूल जिले में द्विभाजन से पहले की गई जनसंख्या की जनगणना पर परिसीमन की प्रक्रिया आधारित है।

CJI बोबड़े ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से कहा कि वो जिलों को द्विभाजित करके चुनाव में देरी के लिए जिम्मेदार हैं और अब कह रहे हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का पालन किया जाना चाहिए और "यदि इसमें स्थगन (चुनावों का) शामिल है, तो यह भी हो।"

इस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने एक सुझाव दिया कि द्विभाजन को वापस लिया जा सकता है और तदनुसार मतदान आयोजित किया जा सकता है। बेंच इस सुझाव से सहमत दिखी।

CJI ने पार्टियों को यह विकल्प दिया कि सुझाव के अनुसार द्विभाजन को वापस लिया जा सकता है और मतदान आयोजित किया जा सकता है, या नवगठित जिलों को अलग करके मतदान मतदान हो सकता है।

पीठ ने तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायणन को इन प्रस्तावों के बारे में सरकार से निर्देश लेने का निर्देश दिया।

नारायणन ने दोपहर के भोजन के बाद वापस आकर कहा कि राज्य चुनाव आयोग 9 नव द्विभाजित जिलों को छोड़कर अन्य सभी जिलों के चुनाव कराने के लिए सहमत है।

इसे संज्ञान में लेते हुए पीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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