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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण की दुर्दशा पर चिंता जताई, सुकना वन्यजीव अभयारण्य के निकट टाटा प्रोजेक्ट को रद्द किया

LiveLaw News Network
6 Nov 2019 10:05 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण की दुर्दशा पर चिंता जताई, सुकना वन्यजीव अभयारण्य के निकट टाटा प्रोजेक्ट को रद्द किया
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सुप्रीम कोर्ट ने सुकना वन्यजीव अभयारण्य के पास टाटा के एक आवासीय प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी को रद्द कर दिया और कहा कि वन्यजीव अभयारण्य से थोड़ी दूरी पर इस तरह की परियोजनाओं को अनुमति नहीं दी जा सकती है।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें टाटा हाउसिंग डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड की एक आवासीय परियोजना के निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर दिया था क्योंकि ये सुकना झील के क्षेत्र में और वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से 123 मीटर की दूरी पर है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता

पीठ ने कहा कि पंजाब राज्य को जनता के विश्वास के सिद्धांत के आधार पर कार्रवाई करने की आवश्यकता थी और ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि 95 विधायकों को फ्लैट दिए जाने थे। अपने फैसले में पीठ ने पर्यावरण और वन्यजीवों की दुर्दशा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की और कहा:

"पृथ्वी और मानव सभ्यता के लिए सबसे अधिक शक्तिशाली खतरा, जो आज के समय में है, पर्यावरणीय क्षरण और वन्यजीव दुर्दशा है। वनस्पतियों और जीवों की रक्षा करने की आवश्यकता है, जो हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के एक प्रमुख हिस्से का गठन करती है।

हमारे प्राकृतिक परिवेश को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने की कीमत पर होने वाला विकास और शहरीकरण बदले में प्रभाव डालेंगे और मानव तबाही का कारण बनेंगे जैसा कि 2013 में उत्तराखंड में और 2018 में केरल में आई बाढ़ में देखा गया था। जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक घटनाओं के समय को बाधित करके वन्यजीवों को प्रभावित कर रहा है। गर्म तापमान के साथ, फूलों के पौधे पहले ही खिल रहे हैं और प्रवासी पक्षी वसंत से पहले ही अपने सर्द इलाकों में लौट रहे हैं।"

अपील को खारिज करते हुए पीठ ने जनता के विश्वास के सिद्धांत के आधार पर फैसला लिया और कहा,

"मानव और साथ ही वन्यजीव अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर हैं। मानव पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर है। मानव की तरह, वन्य जीवन भी अस्तित्व के लिए पर्यावरण पर निर्भर है और पर्यावरण से भी प्रभावित होते हैं।

मानव और पशु के बीच संबंध को खाद्य-श्रृंखला और खाद्य-वेब द्वारा समझा जा सकता है। वन्यजीव आबादी, वनों की कटाई, शहरीकरण, उद्योगों की उच्च संख्या, रासायनिक अपशिष्टों, अनियोजित भू-उपयोग नीतियों और प्राकृतिक संसाधनों आदि के उपयोग में लापरवाही जैसे कई कारणों से प्रभावित होते हैं।"

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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