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  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए अदालतों में CISF तैनात करने पर करने को कहा 

LiveLaw News Network
9 Jan 2020 4:53 AM GMT
  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए अदालतों में CISF तैनात करने पर करने को कहा 
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से कहा कि हिंसा की अनियंत्रित घटनाओं को रोकने के लिए कुछ विशिष्ट अदालतों में CISF का एक अलग कैडर तैनात करने की संभावना पर गौर करे।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाल ही में तीस हजारी अदालत की जटिल हिंसा का जिक्र करते हुए कहा, " अगर CISF की तैनाती की गई होती तो दिल्ली की घटना नहीं हुई होती।"

दरअसल पिछले साल नवंबर में यहां तीस हजारी कोर्ट परिसर में वकील और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी जिसमें कुछ वकील गोली लगने से घायल हो गए थे और कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए थे।

पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे, ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का एक अलग कैडर होना चाहिए जो मुख्य न्यायाधीश के एक फैसले के बाद कुछ अदालतों में सुरक्षा प्रदान करेगा।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में सरकार को एक पत्र भी लिखा है।

मुख्य न्यायाधीश ने मेहता को इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा, "अदालतों में सुरक्षा के लिए CISF की एक अलग विंग हो सकती है। एक अलग कैडर हो सकता है।"

मामले में एमिक्स क्यूरी के रूप में पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि अगर CISF के जवानों को तैनात किया जाता है तो वकीलों के लिए कोई समस्या हो सकती है और यह उचित होगा अगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की राय भी मामले में ले ली जाए।पीठ ने इसके बाद BCI को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह में उसका जवाब मांगा।

दरअसल शीर्ष अदालत प्रद्युम्न बिष्ट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें पारदर्शिता लाने के लिए अदालती कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुरोध किया गया है।

लूथरा ने इस मामले में केंद्र द्वारा दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट की एक प्रति की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल किया था।

पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर एक समान याचिका के साथ सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि सुधारवादी रुख अपनाते हुए और पारदर्शिता लाने के लिए शीर्ष अदालत ने 28 मार्च, 2017 को पहली बार निर्देश दिया था कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के दो जिलों की अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

11 दिसंबर, 2017 को शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा था कि वह अदालत की कार्यवाही की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग को राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) के साथ जोड़ने की संभावना पर गौर करे।

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