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कश्मीर में आतंकवाद रोकने के लिए प्रतिबंध आवश्यक, अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

LiveLaw News Network
21 Nov 2019 1:37 PM GMT
कश्मीर में आतंकवाद रोकने के लिए प्रतिबंध आवश्यक, अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
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अटॉर्नी जनरल (एजी) के के वेणुगोपाल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद और अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबंध आवश्यक थे।

2016 में आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद सार्वजनिक विरोध जैसी पिछली घटनाओं को देखते हुए वर्तमान उपायों को एजी ने सही ठहराया। एजी ने जस्टिस एनवी रमन , सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की पीठ को बताया,

"जब बुरहान वानी को मार दिया गया था तो 3 महीने के लिए तालाबंदी हुई थी। अगर हम आतंकवादी हमलों के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए एक्शन के रूप में ऐसी कार्रवाई नहीं करते हैं तो यह मूर्खतापूर्ण होगा।"

तोड़ने वाले तत्व फोन पर एक बटन को दबाकर लोगों के इकट्ठा करते हैं। इन तत्वों की मण्डली को इंटरनेट द्वारा सुविधा प्रदान की जाती है।

"क्या हम चुप रहने के लिए हैं? क्या यह उचित नहीं था कि सरकार कानून और व्यवस्था की समस्या का अनुमान न लगाए? हम अलगाववादियों और आतंकवादियों को काम करने की अनुमति नहीं दे सकते।", एजी ने कहा।

एजी ने एनआईए बनाम जहूर वटाली मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जहां विशेष अदालत ने आतंकवादियों, हुर्रियत नेताओं और पत्थरबाजों के बीच संबंध पाया था।उन्होंने कहा, यदि संचार की नाकाबंदी नहीं होती, तो हजारों संदेश उग्रवादियों के समन्वय के लिए भेजे जाते।

अदालत अनुराधा भसीन (कार्यकारी संपादक, कश्मीर टाइम्स), कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आज़ाद आदि द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति के उन्मूलन के मद्देनजर संचार नाकाबंदी, इंटरनेट बंद और क्षेत्र में लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को चुनौती दी गई है।

एजी ने कहा,

"भारत सरकार को "बिना एक भी जान गंवाए और बिना कोई गोली दागे बिना" स्थिति को संभालने के लिए बधाई दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 की निष्ठुरता को न देखें, व्यापक तस्वीर को देखें।"

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