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बाल यौन शोषण के लिए मृत्यदंड सहित कठोर सजा के लिए POCSO संशोधन, जानिए खास बातें

LiveLaw News Network
7 Aug 2019 3:57 AM GMT
बाल यौन शोषण के लिए मृत्यदंड सहित कठोर सजा के लिए POCSO संशोधन, जानिए खास बातें
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जब एक पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बलों का सदस्य या एक लोक सेवक एक बच्चे पर भेदक यौन हमला (penetrative sexual assault) करता है और इसके अंतर्गत अन्य मामलों के साथ वह मामले भी शामिल हैं जहां अपराधी बच्चे का रिश्तेदार होता है, या अगर यौन हमला बच्चे के यौन अंगों को चोट पहुंचाता है या कोई बच्ची गर्भवती हो जाती है।

लोकसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से बाल यौन शोषण के लिए सख्त दंड प्रदान करने के लिए यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम [Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act] 2012 में संशोधन करने का विधेयक पारित किया। राज्यसभा ने 24 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

'एग्रावेट पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट 'के लिए न्यूनतम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल करने का प्रस्ताव है। इस अपराध के लिए अधिकतम सजा मृत्युदंड के रूप में प्रस्तावित है।

अधिनियम के अनुसार, 'एग्रावेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' में ऐसे मामले शामिल हैं, जब एक पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बलों का सदस्य या एक लोक सेवक एक बच्चे पर भेदक यौन हमला (penetrative sexual assault) करता है और इसके अंतर्गत अन्य मामलों के साथ वह मामले भी शामिल हैं जहां अपराधी बच्चे का रिश्तेदार होता है, या अगर यौन हमला बच्चे के यौन अंगों को चोट पहुंचाता है या कोई बच्ची गर्भवती हो जाती है।

जहाँ तक कि 'भेदक यौन हमले' का संबंध है, यह विधेयक न्यूनतम सजा को 7 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव करता है। इसमें आगे कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर 'भेदक यौन हमला' करता है, तो उसे 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा एवं जुर्माने के साथ दण्डित किया जाएगा।

इस विधेयक में एग्रावेटेड यौन उत्पीड़न की परिभाषा में 2 और अपराध शामिल किये गए हैं। इनमें शामिल हैं: (i) एक प्राकृतिक आपदा के दौरान किए गए हमले, और (ii) बच्चे को जल्दी यौन परिपक्वता प्राप्त कराने के उद्देश्य से, किसी भी हार्मोन या किसी रासायनिक पदार्थ को एडमिनिस्टर कराना या ऐसा करने में मदद करना।

यह विधेयक बाल पोर्नोग्राफी को, एक बच्चे को शामिल करने वाले यौन आचरण वाले स्पष्ट चित्रण के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें एक वास्तविक बच्चे से अविभाज्य फोटोग्राफ, वीडियो, डिजिटल या कंप्यूटर जनित छवि शामिल हैं।

DMK से कनिमोई और TMC से शताब्दी रॉय ने सजा के रूप में मृत्युदंड का यह कहते हुए विरोध किया कि इस अनुमान का कोई आधार नहीं है कि यह (मृत्युदंड की सजा) एक निवारक/अवरोध (deterrence) के रूप में काम करेगा।

सदन में चर्चा के दौरान, विपक्षी सदस्यों द्वारा उन्नाव मुद्दा उठाया गया। विपक्षी सदस्यों ने यह कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपाय होने चाहिए कि मामले के अन्वेषण/जांच को शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा रोका न जाए और उसमे अवरोध न उत्पन्न किया जाए।

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने यह कहा कि केंद्र ने POCSO मामलों के ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने के लिए धन आवंटित किया है और केंद्र, राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के साथ सहयोग करके उनकी स्थापना और कामकाज की बारीकी से निगरानी करेगा।

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