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भारत में इंटरनेट शटडाउन को असंवैधानिक घोषित किया जाए, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

LiveLaw News Network
17 Jan 2020 4:45 AM GMT
भारत में इंटरनेट शटडाउन को असंवैधानिक घोषित किया जाए, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
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सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें मांग की गई है कि देश भर में इंटरनेट शटडाउन को भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के रूप में घोषित किया जाना चाहिए और इस प्रकार, इसे असंवैधानिक और अवैध घोषित करना चाहिए।

अधिवक्ता एहतेशाम हाशमी द्वारा दायर, जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका में प्रार्थना की गई है कि शीर्ष अदालत दूरसंचार सेवाओं (अस्थायी या सार्वजनिक सुरक्षा) के अस्थायी निलंबन के तहत सरकारी अधिकारियों द्वारा "मनमाने ढंग से इंटरनेट शटडाउन" को रोकने के लिए दिशा-निर्देश दे।

देश के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट और संचार सेवाओं को निलंबित करने के सरकार के कदम पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है, जो कहते हैं कि सरकार का यह मनमाना कार्य, सरकार के संविधान का पालन करने के इरादे पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

याचिका के अनुसार, इंटरनेट और संचार सेवाओं का कोई भी निलंबन भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि इंटरनेट ने एक बुनियादी आवश्यकता की स्थिति प्राप्त कर ली है और तकनीकी प्रगति के इस युग में लोगों के जीवन को बदल दिया है। भारत में दुनिया में इंटरनेट का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता देश है। इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने का सरकार का निर्णय लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने वाला है।

याचिकाकर्ता हाशमी ने कहा,

"संचार सेवाओं का इंटरनेट शटडाउन और निलंबन, किसी व्यक्ति को अपनी राय देने और सूचना प्राप्त करने के अधिकार को प्रतिबंधित करता है।

बिना सूचना के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक पहुंच निरर्थक है। यह न केवल बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करता है, बल्कि इससे अन्य सहायक अधिकार भी प्रभावित होते हैं।"

याचिका में कहा गया है कि भारत के पास दुनिया में इंटरनेट बंद होने के सबसे अधिक मामलों का रिकॉर्ड है, जिसमें से 100 ऐसे उदाहरण सिर्फ 2019 में ही हुए हैं।

विभिन्न स्थानों पर विभिन्न अवसरों पर इंटरनेट सेवाओं के बंद होने का हवाला याचिका में दिया गया है।

कश्मीर में इंटरनेट बंद होने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए, याचिकाकर्ता ने इन सेवाओं को निलंबित करने की कार्रवाई को असंवैधानिक और मनमाना बताया।

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