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सी फ्रंट रोड के चल रहे निर्माण को रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

LiveLaw News Network
3 Sep 2019 6:33 AM GMT
सी फ्रंट रोड के चल रहे निर्माण को रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
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नानी दमन में "सी फ्रंट रोड के निर्माण और देवका बीच के सौंदर्यीकरण" के लिए दी गई सैद्धांतिक मंजूरी एवं चल रहे काम पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता, जितेंद्र मारू ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त की कि उक्त निर्माण के लिए केवल सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, एक समीपवर्ती सड़क मौजूद है जो कि क्षेत्र में कनेक्टिविटी के उद्देश्य के लिए पर्याप्त है, बस अंतर यह है कि वह समुद्र से सटी हुई नहीं है। दमन के निवासियों ने कभी भी देवका समुद्र तट के विनाश की कीमत पर इस तरह के समुद्र का सामना करने वाली सड़क (सी फ्रंट रोड) के निर्माण की मांग नहीं की।

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इसके अलावा याचिका में यह कहा गया है कि तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण, दमन और दीव (Coastal Zone Management Authority, Daman & Diu) ने, परियोजना के लेआउट के साथ-साथ हाई टाइड लाइन (HTL) या लो टाइड लाइन (LTL) के सीमांकन का सत्यापन नहीं किया है।

यदि इस परियोजना को अनुमति दी जानी है, तो उसे असाधारण मामलों में से एक होना चाहिए ताकि HTL और LTL के बीच निर्माण की अनुमति दी जा सके। अगर ऐसा होता है तो निश्चित रूप से यह निर्माण या तो CRZ IA या CRZ IB श्रेणी में आएगा, दोनों ही मामलों में इस तरह के विनाशकारी विकास की अनुमति नहीं है।

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गलत वर्गीकृत को लेकर याचिका में कहा गया है कि, "हालांकि यह क्षेत्र वास्तव में CRZ IA या CRZ IB के अंतर्गत आता है, लेकिन स्पष्ट रूप से malafide और असंगत कारणों के चलते अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और CRZ नोटिफिकेशन के विधायी इरादे के विपरीत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया है। यह ग़लत नोट करते हुए कि यह क्षेत्र सीआरजेड II और सीआरजेड III श्रेणी के अंतर्गत आता है, उत्तरदाताओं ने सीआरजेड क्लीयरेंस का तमाशा बनाया। "

यह भी कहा गया कि परियोजना के लिए एक व्यापक पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट की आवश्यकता होगी, जो प्रशासन द्वारा जारी नहीं किया गया, जो परियोजना के निर्माण की अनुमति देते समय अधिकारियों द्वारा तर्क के गैर-उपयोग को दर्शाता है।

याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताओं का पालन न करने के कारण दमन के तट को व्यापक और अपूरणीय क्षति से गुजरना होगा। इस प्रकार याचिका में, तटीय विनियमन क्षेत्र के प्रावधानों की आड़ में परियोजना के लिए, 2 मार्च, 2019 को मिली सैद्धांतिक मंजूरी को रद्द करने की प्रार्थना की गयी है।

याचिका में यह घोषणा किए जाने की मांग की गयी है कि अंतिम CRZ क्लीयरेंस और पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राप्त किए बिना, काम की शुरुआत अवैध है और आगे उत्तरदाताओं को यह निर्देशित करने की मांग की गयी है कि देवका समुद्र तट की उस स्थिति को बहाल किया जाए, जो स्थिति कार्य शुरू होने के पूर्व में थी। आगे अंतरिम राहत के माध्यम से, यह मांगी की गयी है कि चल रही निर्माण गतिविधियों पर रोक लगे।



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