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चंडीगढ़ में साइकिल ट्रैक /पैदल रास्तों के दुरुपयोग के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जारी किए निर्देश

LiveLaw News Network
7 Oct 2019 12:11 PM GMT
चंडीगढ़ में साइकिल ट्रैक /पैदल रास्तों के दुरुपयोग के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जारी किए निर्देश
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चंडीगढ़ के दक्षिणी सेक्टरों में साइकिल ट्रैक /पैदल रास्तों के दुरुपयोग के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इसी पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक उपायों के संबंध में कई निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति अमोल रतन सिंह की पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं-

1. छह महीने के भीतर सभी पैदल पथ/ साइकिल पटरियों या साइकिल ट्रैक की मरम्मत करें।

2. तीन महीने के भीतर मुख्य सड़कों से स्लिप रोड़ या अभिगम मार्ग तक पीले बॉक्स की मार्किंग करें और इस बात को सुनिश्चित करने के लिए, कि इन रास्तों पर दोपहिया वाहन न चलें,इसके लिए इन रास्तों के शुरूआत और अंत में साइन बोर्ड लगा दिए जाएं।

3. पर्यावरण और पारिस्थितिकी या इकोलाॅजी को बचाने के लिए सार्वजनिक साइकिल प्रणाली के तहत डॉक स्टेशन तैयार करें।

4. तीन महीने के भीतर सभी ट्रैफिक लाइट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात और सुरक्षा) द्वारा चिन्हित किए जाने वाले सभी कमजोर बिंदुओं पर हाई डेफिनिशन (एचडी) कैमरे लगाए जाएं। इस संबंध में, अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन के पास इस निर्देश के अनुपालन के लिए पर्याप्त धन है क्योंकि चंडीगढ़ ''स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट'' के तहत आता है।

5. सुनिश्चित करें कि इन पटरियों पर कोई वाहन खड़ा न हो। पीठ ने कहा कि इस निर्देश का उल्लंघन होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या एसएसपी (यातायात और सुरक्षा) को भी निर्देश दिए गए थे-

1. सुनिश्चित करें कि तीन सप्ताह बाद शहर में कोई भी ऑटो रिक्शा बिना मीटर के न चल पाएं।

2. मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 194-ई को सख्ती से लागू करें, जो आपातकालीन वाहनों को मुफ्त मार्ग (फ्री पैसेज) पर जाने की अनुमति देने में विफलता के लिए दंड निर्धारित करता है।

इस संबंध में अनुपालन शपथ पत्र सचिव परिवहन, चंडीगढ़ प्रशासन (नोडल अधिकारी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात और सुरक्षा) द्वारा मामले की अगली तारीख, यानी 17 जनवरी, 2020 तक दायर किया जाए।

यह निर्देश एमिकस क्यूरी यानि कोर्ट मित्र बलविंदर सांगवान पंजाब के सहायक एडवोकेट जनरल लावण्या पॉल, हरियाणा के डिप्टी एडवोकेट जनरल विवेक सैनी, भारत के सहायक सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन मित्तल, केंद्र के वकील वरुण इस्सर, चंडीगढ़ नगर निगम की अधिवक्ता दीपाली पुरी, सरकारी अभियोजक आर.एस राय साथ में अतिरिक्त सरकारी वकील गौतम दत्त और सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल ( वरिष्ठ स्थायी वकील )पंकज जैन साथ में अतिरिक्त स्थायी वकील परमिंदर सिंह कंवर की उपस्थिति में जारी किए गए थे।



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