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निर्भया मामला : दोषी विनय ने उपराज्यपाल के पास अर्जी लगाकर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की 

LiveLaw News Network
9 March 2020 2:53 PM GMT
निर्भया मामला : दोषी विनय ने उपराज्यपाल के पास अर्जी लगाकर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की 
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2012 के दिल्ली गैंगरेप और हत्या के दोषी विनय शर्मा ने दिल्ली के उपराज्यपाल का दरवाजा खटखटाया है और अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की है।

दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC ) की धारा 432 और 433 के तहत सरकार की शक्ति का आह्वान करते हुए विनय ने LG से उसकी सजा निलंबित करने और उसे उम्रकैद में बदलने करने का अनुरोध किया है।

वकील एपी सिंह के माध्यम से दायर उसके आवेदन में कहा गया है कि उसने न्यायपालिका के समक्ष कई असफल प्रयास किए हैं, लेकिन यह पहली बार है कि वह कार्यपालिका से संपर्क कर रहा है।

वह कहता है कि जैसे-जैसे उसका जीवन समाप्त हो रहा है, वह एक अंतिम अवसर चाहता है कि वह कार्यपालिका से दया की अपील करे और उसे मौत से बचाने के लिए भीख मांगे। इसके लिए, उपराज्यपाल के समक्ष अपने कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से उसे मौखिक प्रतिनिधित्व देने की अपील की गई है।

आवेदन में बड़े पैमाने पर उन परिस्थितियों का वर्णन किया गया है जिनका उसने 7 साल से जेल में रहने के बाद से सामना किया था। उसने पुलिस और जेल के कैदियों द्वारा समान रूप से पिटाई, प्रताड़ित और अपमानित होने के कई उदाहरणों पर प्रकाश डाला है।

यह प्रस्तुत किया है कि उसके बूढ़े माता-पिता हैं और वो एक गरीब परिवार से है। इस पर विचार करने के लिए उसने ऐसे उदाहरणों का हवाला दिया है, जहां शीर्ष अदालत ने दोषी की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के आधार पर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का फैसला दिया।

इसके अलावा, विनय ने उस घटना के लिए खेद व्यक्त किया है और कहा है कि जेल में रहते हुए वो सुधार की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास कर रहा है।वह सुधार के रास्ते पर है, लेकिन अदालतों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

विनय ने कहा है कि निष्पक्षता और न्याय के हित में मामले की बारीकियों को समझाने के लिए उपराज्यपाल के समक्ष एक मौखिक सुनवाई महत्वपूर्ण है। जिस मानसिक और शारीरिक यातना से वह गुज़रा है, उसके सुधार की दिशा में उसका रास्ता और उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियां वो आधार हैं जिन के आधार पर सजा के निलंबन और मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की है।

इस मामले में निचली अदालत ने पांच मार्च को मौत की सजा के चारों दोषियों को 20 मार्च, 2020 को सुबह 5.30 बजे फांसी के लिए डेथ वारंट जारी किया गया है।

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