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कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, कश्मीर में तालबंदी ने 70 लाख लोगों का जीवन पंगु बना दिया

LiveLaw News Network
6 Nov 2019 4:02 PM GMT
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, कश्मीर में तालबंदी ने 70 लाख लोगों का जीवन पंगु बना दिया
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जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद के लिए पैरवी करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कश्मीर में तालाबंदी ने 7 मिलियन (70 लाख) लोगों के जीवन को पंगु बना दिया है।

सिब्बल ने जस्टिस रमाना, जस्टिस सुभाष रेड्डी और जस्टिस बी आर गवई की पीठ को बताया, "कभी भी 7 मिलियन लोगों के जीवन को इस तरह से अपंग नहीं किया गया।"

सिब्बल ने कहा, "राज्य मुझे जम्मू-कश्मीर जाने या न जाने के लिए नहीं कह सकते। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत राज्य मेरे अधिकारों का हनन नहीं कर सकते और यह नहीं कह यहां भाषण मत दो या अपने घर के अंदर रहो।"

उन्होंने कहा कि राज्य को नागरिक की रक्षा करनी चाहिए। यहां तक कि अगर कुछ अधिकार प्रतिबंधित हैं, तो भी राज्य को प्रतिबंधों के भीतर नागरिक की रक्षा करनी चाहिए। यहां राज्य बहुत से उन अधिकारों को नष्ट कर रहा है, जो रक्षक हैं, इनकी सुरक्षा होनी चाहिए।

उन्होंने पूछा, "कौन से कानून के तहत राज्य ने मुझे जानकारी प्राप्त करने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है? और अस्पताल में जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की कमी के बारे में सामान्य समाचार प्राप्त करने वाला कोई व्यक्ति राज्य की सुरक्षा के लिए कैसे खतरा है? यह जानकारी विदेशी संबंधों को कैसे प्रभावित करती है?"

आतंकवाद के बहाने सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता है। भले ही सरकार को लगता है कि अशांति होगी, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। सार्वजनिक व्यवस्था के बंद करने और दावों के बीच कोई आपसी संबंध नहीं है।

गुलाम नबी आज़ाद की मांग

शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों की समाप्ति के बाद राज्य में सामाजिक स्थितियों की जांच करने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य का दौरा करने की कोशिश की थी, लेकिन जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति हटने के कारण अधिकारियों द्वारा हवाई अड्डे से उन्हें वापस भेज दिया गया।

गुलाम नबी आज़ाद को मिली थी सशर्त अनुमति

16 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने आजाद को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की अनुमति इस शर्त पर दी कि वह 'राजनीतिक रैली या राजनीतिक गतिविधि' में शामिल न हों। गुलाम नबी आजाद की याचिका पर सुनवाई से पहले पीठ ने बुधवार को कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन द्वारा दायर याचिका पर अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की दलीलें सुनीं।

सुप्रीम कोर्ट ने वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें लगातार दूसरे दिन सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में लगाए गए इंटरनेट बैन और मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें लगातार दूसरे दिन सुनीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इंटरनेट और मीडिया की तालाबंदी पिछले 90 दिनों से कश्मीर में जारी है, जो बोलने की आज़ादी पर अनुचित प्रतिबंध है।

इन दोनों मामलों की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

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