Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

अयोध्या विवाद : मुस्लिम पक्षों ने सुलह और अपना दावा वापस लेने की खबरों का किया खंडन, पढ़िए बयान

LiveLaw News Network
18 Oct 2019 7:40 AM GMT
अयोध्या विवाद : मुस्लिम पक्षों ने सुलह और अपना दावा वापस लेने की खबरों का किया खंडन, पढ़िए बयान
x
अयोध्या मामले में इस दावे को ख़ारिज करते हुए कि मुस्लिम पक्षों ने विवादित ज़मीन पर अपने दावे से पीछे हटते हुए अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझा लिया है, इन पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में एक बयान दाख़िल किया है।

अयोध्या-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के अंतिम दिन की सुनवाई के दौरान इस तरह की रिपोर्ट आई थी कि मुस्लिम पक्षों ने अपनी अपील वापस ले ली है। मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड के वक़ील शाहिद रिज़वी को उद्धृत करते हुए यह कहा गया कि इस मामले में सुलह हो गई है।

अब मिस्लिम पक्षों द्वारा इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया गया है और वक़ील एजाज़ मक़बूल के माध्यम से जो बयान दाख़िल किया गया है उसमें इस तरह की रिपोर्ट को आधारहीन बताया गया है।

इस बयान में कहा गया है कि

"मीडिया में शाहिद रिज़वी के हवाले से चल रही इस तरह की रिपोर्ट से हमें आश्चर्य हुआ है कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड बाबरी मस्जिद स्थल पर अपने दावे को वापस लेने के लिए तैयार है।"

बयान में कहा गया है कि इस ख़बर को या तो मध्यस्थता समिति या निर्वाणी अखाड़ा या अन्य द्वारा लीक किया गया है। निर्वाणी अखाड़ा मस्जिद पर अपना दावा करता है।

यह स्पष्ट किया गया कि केवल सीमित लोग ही मध्यस्थता की प्रक्रिया से जुड़े थे। इस प्रक्रिया में शामिल लोगों में निर्वाणी अखाड़ा के धर्म दास, सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के ज़फ़र फ़ारूक़ी और हिंदू महासभा के चक्रपाणि हैं। एक ऐसी स्थिति में जब पक्षों ने खुलेआम यह कहा था कि वे सुलह के पक्ष में नहीं हैं, मध्यस्थता करना मुश्किल था।

बयान में कहा गया है,

a) मध्यस्था समिति के समक्ष जो हाल ही में प्रयास हुए वे प्रतिनिधात्मक नहीं थे।
b) इस बात को लीक या तो सीधे मध्यस्थता समिति ने किया है या फिर उन्होंने किया जो इस मध्यस्था में शामिल थे। (इस बात पर ज़ोर दिए जाने की ज़रूरत है कि इस तरह का लीक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ है, जिसने कहा था कि इस प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाएगा)।
c) प्रेस को जिस समय इस बात को लीक किया गया है और रिज़वी का 17 अक्टूबर 2019 को इसकी उस दिन ही पुष्टि करना जिस दिन इस मामले में सुनवाई बंद हुई, ऐसा लगता है कि ऐसा पूरा सोच समझकर किया गया है। पंचू भी सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर को मौजूद थे और वे ज़फ़र फ़ारूक़ी से इस परिसर में बातचीत कर रहे थे।

इस बयान का अंत यह कहते हुए किया गया है कि -

"इस तरह हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में एक अपीलकर्ता के रूप में उस प्रस्ताव को नहीं मानते हैं जिसे सामने रखा गया है और जिसकी जानकारी प्रेस को लीक कर दी गई है और न ही हम इस प्रक्रिया को मानते हैं जिसके माध्यम से मध्यस्थता की गई है और न ही उस तरीक़े से हम इत्तफ़ाक़ रखते हैं जिस तरीक़े में अपना दावा छोड़ने को सुलह बताया गया है।"


बयान की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



Next Story