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मेहुल चौकसी के घर नोटिस चस्पा हो, विज्ञापन दें, सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आदेश दिया

LiveLaw News Network
27 Sep 2019 10:52 AM GMT
मेहुल चौकसी के घर नोटिस चस्पा हो, विज्ञापन दें,  सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आदेश दिया
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जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को गुजरात के ज्वैलर से कहा है कि वो गीतांजलि जैम के प्रमोटर मेहुल चौकसी के खिला़फ जारी अदालत के नोटिस को समाचार पत्रों में प्रकाशित करे और मुंबई में चौकसी के अंतिम पते पर उसे चस्पां करे। गौरतलब है कि ज्वैलर ने चौकसी पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।

याचिकाकर्ता ने गुजरात HC के 2017 के आदेश को दी है SC में चुनौती

दरअसल याचिकाकर्ता दिग्विजय सिंह हिम्मत सिंह जडेजा ने गुजरात उच्च न्यायालय के मई 2017 के उस आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है जिसने चौकसी व उसकी पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता के लिए अपील करते हुए वकील शुभ्रांशु पाधी ने पीठ को यह सूचित किया कि अदालत का 2 फरवरी 2018 का नोटिस चौकसी और उनकी पत्नी को नहीं दिया जा सकता क्योंकि वे देश में उपलब्ध नहीं हैं।

"नोटिस का जवाब न आने की स्थिति में होगा एमिकस क्यूरी नियुक्त करने पर विचार"

इस पर पीठ ने कहा "हमने खबर में देखा है कि चौकसी एंटीगुआ में है और उसे वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।" पीठ ने ये भी कहा कि अगर नोटिस का जवाब नहीं आता है तो वो इस केस में एमिकस क्यूरी नियुक्त करने पर विचार करेंगे।

याचिकाकर्ता का मामला

जडेजा ने यह कहा कि उन्होंने चोकसी के साथ 108 किलो सोने का निवेश किया था क्योंकि चौकसी ने एक योजना के तहत उच्च रिटर्न का वादा किया था लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं हुआ।

यह कहा गया, "उन्होंने (चौकसी) ने जाली और गढ़े हुए दस्तावेज तैयार किए थे, ताकि शिकायतकर्ता को धोखा दिया जा सके और बहुमूल्य संपत्ति को गलत तरीके से हड़पने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक साजिश रची गई। पूरे प्रकरण की जांच की आवश्यकता है ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आए।"

सुनवाई की आखिरी तारीख पर शीर्ष अदालत ने चौकसी और उनकी पत्नी को जडेजा द्वारा दायर विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी किया था। दरअसल इस शिकायत पर गांधी नगर में मेहुल व उनकी पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी जिसमें धोखाधड़ी, ठगी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई थीं। लेकिन वर्ष 2017 में मेहुल चौकसी की याचिका पर गुजरात हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

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