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मद्रास हाईकोर्ट के वकीलों ने सीएए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा की

LiveLaw News Network
5 Jan 2020 6:51 AM GMT
मद्रास हाईकोर्ट के वकीलों ने सीएए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा की
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मद्रास हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के एक समूह ने चेन्नई पुलिस द्वारा सीएए के विरोध में किए गए "कोलम" विरोध प्रदर्शन के खिलाफ की गई कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठाई है। वकीलों के एक समूह ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

29 दिसंबर 2019 को, शास्त्री नगर पुलिस ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ "कोलम" ड्राइंग बनाने के लिए वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता गायत्री खंडादाई को हिरासत में लिया। गायत्री को कानूनी सहायता देने थाने गए तीन अन्य वकीलों को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बाद में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

1 जनवरी को पुलिस आयुक्त, चेन्नई ए.के.विश्वनाथन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जहां उन्होंने 'कोलम' विरोध प्रदर्शन के खिलाफ टिप्पणी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गायत्री के पाकिस्तान के साथ संबंध हैं। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि इस बयान से पहले किसी भी तरह की कोई जांच नहीं की गई। आयुक्त के बयानों के बाद, गायत्री को ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

इस मामले में प्रमुख वकील आर वैगई, सुधा रामलिंगम, टी मोहन, एलिजाबेथ शेषाद्री आदि के नेतृत्व में वकीलों एक समूह ने कहा,

"पुलिस आयुक्त के गैर ज़िम्म्मेदाराना बयान उकसाने वाला है और इसने गायत्री को नुकसान पहुंचाने और उनके जीवन और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। गायत्री से पूछताछ नहीं की गई और न ही पुलिस ने उन्हें बचाव करने का कोई मौका दिया।

उचित सत्यापन और जांच के बिना बयान जारी करने के लिए पुलिस बल के सर्वोच्च अधिकारी का असंतुलित होना दर्शाता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विरोध को खारिज करने के लिए वीडियो और अन्य सामग्रियों के साथ छेड़छाड़ की गई है प्रदर्शनकारियों को बदनाम करते हैं जो संवैधानिक तरीके से अपना असंतोष व्यक्त करते हैं।"

वकीलों ने लड़ा था पुलिस की ज़्यादतियों के खिलाफ केस

वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस आयुक्त उन अधिवक्ताओं को निशाना बनाने के लिए द्वेष के साथ काम कर रहे हैं, जिन्होंने 2009 में मद्रास उच्च न्यायालय में पुलिस ज्यादतियों के खिलाफ एक केस लड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप विश्वनाथन को निलंबित कर दिया गया था। हिरासत में लिए गए वकीलों में से एक गायत्री और टी मोहन, वकीलों की टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने उस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता आर वैगई की सहायता की।

उन्होंने कमिश्नर से "गायत्री और अन्य प्रदर्शनकारियों के बारे में उनके बयानों को तुरंत वापस लेने और उन्हें बिना शर्त माफी मांग़ने के लिए कहा। उन्होंने यह भी मांग की कि उन्हें जांच से हटा दिया जाए। उन्होंने कहा,

"राज्य मशीनरी को हमारे नागरिकों के स्वतंत्र भाषण और सख्त असंतोष को व्यवस्थित रूप से दबाने के लिए तैनात किया जा रहा है। सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का राज्य विरोध कर रहा है। सभी प्रदर्शनों को अपराध के तौर पर देखा जा रहा है।

पिछले सप्ताह में विभिन्न शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले हजारों प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। संवैधानिक अधिकारों और मूल्यों का उपहास है क्योंकि पुलिस ने स्वीकार किया है कि ये विरोध प्रदर्शन कानून और व्यवस्था के निहितार्थ के साथ शांतिपूर्ण थे। राज्य अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है और आपराधिक न्याय प्रशासन का उपयोग डराने के लिए किया जा रहा है।"

मद्रास हाईकोर्ट के वकीलों ने शुक्रवार को सीएए-एनआरसी के खिलाफ एक विरोध मार्च आयोजित किया था।

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