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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति संजय यादव दुर्व्यवहार की शिकायत की, ट्रांसफर का अनुरोध

LiveLaw News Network
13 Sep 2019 10:16 AM GMT
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति संजय यादव दुर्व्यवहार की शिकायत की, ट्रांसफर का अनुरोध
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को संबोधित एक पत्र में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति संजय यादव को उनके लगातार दुर्व्यवहार के कारण राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति संजय यादव, वर्तमान में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के तीसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। चूंकि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालय के 2 वरिष्ठतम न्यायाधीशों के एलिवेशन की सिफारिश की है, इसलिए अधिवक्ताओं को यह लगता है कि न्यायमूर्ति संजय यादव, जबलपुर में उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ में उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने के लिए कतार में हैं।

कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रविशंकर झा को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने और दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी को आंध्र प्रदेश के पहले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।

5 सितंबर को बुलाई गई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जिला बार एसोसिएशन और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन की संयुक्त मीटिंग में इस पर चिंता व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया था।

"... माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय यादव की जबलपुर में प्रशासनिक न्यायाधीश/कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी उपस्थिति, उच्च न्यायालय के सुचारू कामकाज के लिए हानिकारक होगी और इससे न्याय व्यवस्था पटरी से उतरेगी," पत्र में कहा गया।

पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति संजय यादव का बेलगाम रवैया नया नहीं था और "व्यक्तिगत अधिवक्ताओं के साथ-साथ बार एसोसिएशन द्वारा पहले भी कई शिकायतें की गई थीं। अतीत में भी इसी कारण के चलते माननीय न्यायमूर्ति को प्रधान पीठ जबलपुर से ग्वालियर खंडपीठ में स्थानांतरित किया गया था। हाईकोर्ट की ग्वालियर और इंदौर बेंच के बार एसोसिएशनों ने कई मौकों पर प्रस्ताव पारित कर न्यायमूर्ति श्री संजय यादव को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।"

अधिवक्ताओं का मानना था कि प्रधान बेंच में जस्टिस संजय यादव की संभावित पोस्टिंग से, बार और बेंच के बीच टकराव होने की सम्भावना थी। चिट्ठियों के पिछले उदाहरणों का हवाला देते हुए, पत्र में कहा गया है, "कई अवसरों पर न्यायमूर्ति की अदालत का बहिष्कार किया गया है ... जबलपुर में प्रैक्टिस कर रहे कई अधिवक्ताओं के प्रति माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय यादव का रवैया प्रतिशोधी है, एवं उनके साथ उनकी व्यक्तित्व शत्रुता है। कई वरिष्ठ वकीलों ने लंबे समय से उनकी अदालत में पेश होना बंद कर दिया है, उनमें से कुछ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं/रहे हैं। उनकी अदालत में माहौल लगातार आवेशित और शत्रुतापूर्ण रहता है और संभावित रूप से दिन-प्रतिदिन संघर्ष की ओर बढ़ता रहता है।"

अधिवक्ता ने इसलिए संकल्प लिया कि "इस प्रकार यह उचित होगा कि माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम के सदस्यों को इन सबसे अस्थिर स्थितियों से पहले ही अवगत करा दिया जाएगा, ताकि न्यायमूर्ति संजय यादव को राज्य से बाहर स्थानांतरित करके, बार और बेंच के बीच संभावित संघर्ष को टाल दिया जाए, यह एक ऐसी स्थिति होगी जो सभी संबंधित व्यक्तियों के लिए लाभकारी होगी और न्याय के प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए वांछनीय है।"



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