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कर्नाटक में अयोग्य विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो दिन करेगा सुनवाई, EC ने कहा, दोबारा चुनाव लड़ना उनका अधिकार

LiveLaw News Network
23 Sep 2019 10:26 AM GMT
कर्नाटक में अयोग्य विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो दिन करेगा सुनवाई, EC ने कहा, दोबारा चुनाव लड़ना उनका अधिकार
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कर्नाटक में अयोग्य करार दिए गए 17 बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट बुधवार को इस बात का परीक्षण करने को तैयार हो गया है कि कर्नाटक में उपचुनाव कराने पर रोक लगाई जाए या बागी अयोग्य विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए।

जस्टिस एन. वी. रमना, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वो अंतरिम राहत के लिए बुधवार और गुरुवार 2 दिन सुनवाई करेगी। हालांकि इस दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि उपचुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती लेकिन अयोग्यता किसी के भी चुनाव लड़ने के अधिकार के बीच में नहीं आ सकती।

पीठ ने विभिन्न पक्षों को जारी किया नोटिस

कांग्रेस नेताओं की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने किसी भी अंतरिम राहत का विरोध किया और कहा कि वो गुरुवार को इस पर बहस करेंगे। पीठ ने कांग्रेस नेता सिद्धारामैया, दिनेश गुंडूराव, कर्नाटक विधानसभा स्पीकर और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

अयोग्य विधायकों का तर्क

अयोग्य कर्नाटक के विधायकों की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया है कि 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव नहीं होने चाहिए क्योंकि चुनाव आयोग ने शनिवार को उपचुनावों की अधिसूचना जारी कर दी है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अन्यथा उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।

रोहतगी ने कहा कि वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल के लिए उन्हें वर्ष 2023 तक अयोग्य घोषित करने का स्पीकर का फैसला कानूनी रूप से गलत है। रोहतगी ने यह तर्क दिया कि स्पीकर ने नोटिस का जवाब देने के लिए केवल 3 दिन का समय दिया जबकि विधानसभा के नियमों के अनुसार न्यूनतम 7 दिन का समय दिया जाना चाहिए। अयोग्य ठहराए जाने वाले मामले को फिर से अध्यक्ष के पास भेजा जाना चाहिए। मुकुल रोहतगी ने कहा कि आगामी उपचुनाव लड़ने से उन्हें रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये उनका संवैधानिक अधिकार है।

कर्नाटक के 17 अयोग्य विधायकों पहुँचे हैं सुप्रीम कोर्ट

गौरतलब है कि कर्नाटक के 17 अयोग्य विधायकों ने तत्कालीन स्पीकर के. रमेश कुमार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं जिसमें उनके इस्तीफे को खारिज कर दिया था और उन्हें 15वीं कर्नाटक विधानसभा के कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। विधायकों को येदियुरप्पा मंत्रालय में शामिल नहीं किया जा सका क्योंकि उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था।

"अयोग्य ठहराया जाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन"

विधायकों ने अयोग्य ठहराए जाने को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है क्योंकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विश्वास मत के दौरान सदन में उपस्थित होने के लिए बाध्य करने के लिए स्पीकर द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता है। उन्होंने अध्यक्ष पर 10वीं अनुसूची के प्रावधानों को तोड़-मरोड़कर अयोग्य ठहराने को गलत बताया और यह भी कहा है कि अनिवार्य नोटिस अवधि के बिना निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने संविधान की व्याख्या के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की।

"स्पीकर ने इस्तीफे पर फैसला करने से पहले किया अयोग्य घोषित"

अपनी याचिका में बागी विधायकों ने यह भी तर्क दिया है कि उनमें से अधिकांश ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और उनके इस्तीफे पर फैसला करने के बजाए स्पीकर ने अवैध रूप से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जबकि सदन के स्पीकर को पहले इस्तीफों पर फैसला करना चाहिए था। यह भी तर्क दिया गया है कि स्पीकर ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया है क्योंकि अयोग्यता से पहले कोई सुनवाई नहीं की गई।

"28 जुलाई को पारित स्पीकर का आदेश 'अवैध एवं मनमाना"

इन अयोग्य विधायकों ने यह कहा है कि 28 जुलाई को पारित स्पीकर के आदेश "पूरी तरह से अवैध, मनमाने और दुर्भावनापूर्ण" हैं क्योंकि उन्होंने मनमाने ढंग से उनके स्वैच्छिक इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा है कि उन्होंने 6 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था लेकिन स्पीकर के. आर. रमेश कुमार ने कांग्रेस पार्टी द्वारा 10 जुलाई को "पूरी तरह से गलत" याचिका के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।

वहीं 3 JDS सदस्यों - ए. एच. विश्वनाथ, के. गोपालैया और के. सी. नारायगौड़ा ने उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपनी अलग रिट याचिका दायर की है और स्पीकर के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

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