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जस्टिस आर बानुमथी : 13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में कोई महिला जज आईं

LiveLaw News Network
17 Nov 2019 10:27 AM GMT
जस्टिस आर बानुमथी : 13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में कोई महिला जज आईं
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एक दशक से अधिक समय, लगभग 13 साल के बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में किसी महिला जज को स्थान मिला है। जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायरमेंट के साथ जस्टिस आर बानुमथी अब सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक हो गई हैं।

जस्टिस बानुमथी तमिलनाडु से हैं और 2014 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत हुई थीं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जिला और सत्र न्यायाधीश के रूप में की थी। बाद में उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। वह झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रहीं और फिर उनके लिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनने की सिफारिश की गई।

नौ महीनों का कार्यकाल शेष :

जस्टिस बानुमथी नौ महीने की अवधि के लिए कॉलेजियम का हिस्सा होंगी, क्योंकि वह 19 जुलाई, 2020 को सेवानिवृत्त होंगी। हालांकि वह शीर्ष तीन जजों में जगह नहीं बना सकेंगी, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद तीन अन्य न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की तारीख आती है।

सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों में से केवल तीन महिलाएं हैं। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी अन्य दो महिला न्यायाधीश हैं। पिछले साल न्यायमूर्ति आर बानुमथी और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी के रूप में एक सर्व-महिला पीठ की दुर्लभता देखी गई, जो 5 और 6 सितंबर को कोर्ट नंबर 12 में बैठी थी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

अब तक सुप्रीम कोर्ट ने केवल 8 महिला न्यायाधीशों को देखा है। इससे पहले जस्टिस रूमा पाल अंतिम महिला न्यायाधीश रहीं जो इस कॉलेजियम में थीं। (वह सबसे लंबे समय तक सेवारत न्यायाधीश रहीं)

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस फातिमा बीबी, जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना देसाई का कार्यकाल अपेक्षाकृत कम था। इनमें से अधिकांश न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय में एकमात्र महिला न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।

एक और तथ्य यह है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की अध्यक्षता कभी किसी महिला न्यायाधीश ने नहीं की है।

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