अनुच्छेद 370 : J&K में प्रतिबंध संबंधी आदेश दाखिल न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर उठाए सवाल

LiveLaw News Network

16 Oct 2019 8:44 AM GMT

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  • अनुच्छेद 370 : J&K में प्रतिबंध संबंधी आदेश दाखिल न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर उठाए सवाल

    श्रीनगर पुलिस द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बहन और बेटी सहित महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने घाटी में संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा हटाने के बाद कश्मीर में बंद और प्रतिबंध से संबंधित सभी आदेशों को दाखिल करने में केंद्र की विफलता पर सवाल उठाए हैं।

    जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई के साथ जस्टिस एनवी रमना की तीन जजों की पीठ ने जम्मू-कश्मीर पर लगाए गए प्रतिबंधों के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ना करने पर नाराज़गी जाहिर की।

    "क्या यह उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया गया है?"

    कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि "क्या यह उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया गया है?" सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि केंद्र ने कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन सहित कई संबंधित पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई की पहली तारीख 1 अक्टूबर को हलफनामा दाखिल किया था लेकिन भसीन की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि प्रतिबंध के आदेशों पर सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है

    "परिस्थितियों में बदलाव" का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने अपनी प्रार्थनाओं के दायरे का विस्तार किया है जिसमें मूल रूप से घाटी में संचार और प्रेस पर प्रतिबंध हटाने के लिए अनुरोध किया था। केंद्र ने बंदी के आदेशों को पेश करने और पहले से दायर हलफनामे को अपडेट करने के लिए समय मांगा।

    भसीन की वकील की आपत्ति पर कोर्ट सहमत

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि याचिका में मूल रूप से इस क्षेत्र में प्रतिबंधों को उठाने के लिए प्रार्थना की गई थी। जमीन पर स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है। याचिकाकर्ता ने अब आदेशों को प्रस्तुत करने की प्रार्थना के दायरे का विस्तार किया है ।

    भसीन की वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि इन आदेशों का प्रस्तुतीकरण केंद्र के फैसलों की वैधता की जांच करने की दिशा में पहला कदम था। कोर्ट ने सहमति जताई ।

    हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने प्रतिबंधों के आदेश को रिकॉर्ड पर रखने के लिए केंद्र की इच्छा की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कार्यकारी आदेशों पर अपील नहीं कर सकता।" यह टिप्पणी वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे द्वारा एक त्वरित हस्तक्षेप पर की गई जिन्होंने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता "प्रशासनिक आदेशों पर अपील में नहीं बैठे हैं लेकिन हम अदालत को बता सकते हैं कि आपके द्वारा रखी गई सामग्री अपर्याप्त है।"

    सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने केंद्र को कश्मीर में बंद और प्रतिबंधों से संबंधित सभी आदेशों को रिकॉर्ड करने का आदेश दिया। अदालत ने वकीलों से कहा कि वह 22 अक्टूबर के बाद मामले की सुनवाई करेगी । "हम इसे 22 अक्टूबर के बाद सुनेंगे। हमने तब कर्नाटक विधायक मामले को सूचीबद्ध किया है। "

    दवे ने कहा कि वर्तमान मामला "कहीं अधिक गंभीर है ।" सुनवाई की अगली तारीख 25 अक्टूबर तय की गई है ।

    दरअसल मंगलवार को श्रीनगर में जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के विरोध में महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

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