Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

जामिया हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश देने से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने को कहा 

LiveLaw News Network
17 Dec 2019 10:44 AM GMT
जामिया हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश देने से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने को कहा 
x

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ पुलिस हिंसा की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।

"मामले और विवाद की प्रकृति के संबंध में, और जिस विशाल क्षेत्र में मामला फैला हुआ है, हमें नहीं लगता कि इसके लिए एक समिति नियुक्त करना संभव है। उच्च न्यायालयों से संपर्क किया जा सकता है जहां घटनाएं हुई हैं," वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह, संजय हेगड़े और कॉलिन गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया।

पीठ ने कहा,

"उच्च न्यायालयों को भारक सरकार और राज्य सरकार की सुनवाई के बाद जांच के उद्देश्यों के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की स्वतंत्रता है।"

शुरुआत में पीठ ने याचिकाओं पर विचार करने के लिए अपनी असहमति व्यक्त की और कहा कि यह "ट्रायल कोर्ट" नहीं है।

"हम एक ट्रायल कोर्ट नहीं हैं। हम तथ्यों को स्थापित नहीं करेंगे। आपको यह समझना चाहिए, " CJI ने याचिकाकर्ताओं से कहा।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने शिकायत की कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला किया था।

"छात्रों को इस तरह से जेलों में नहीं डाला जा सकता है," जयसिंह ने कहा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की अनुमति के बिना पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया।

जवाब में CJI ने पूछा कि "यदि छात्र इस तरह का व्यवहार करते हैं तो अधिकारियों को क्या करना चाहिए? यदि छात्रों पथराव करते हैं तो क्या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी?"

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि एक भी छात्र को गिरफ्तार नहीं किया गया है। SG ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील भी खारिज कर दी कि छात्रों को "अफवाहों" के रूप में चिकित्सा सहायता से वंचित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी चोटें आईं।

किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है। यह बिलकुल झूठ है। पुलिस अफसर यहां हैं। वे आपको तथ्य देंगे।

CJI ने कहा कि हम आपका बयान दर्ज करेंगे कि छात्रों की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। लेकिन अवैध गतिविधियां नहीं हो सकती हैं। पुलिस के पास ऐसी सभी आपराधिक गतिविधियों को समाप्त करने का अधिकार है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, जो रविवार की दोपहर को जामिया में शुरू हुआ, पर दिल्ली पुलिस की ओर से बल का अत्यधिक उपयोग किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में जबरदस्ती प्रवेश और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के साथ-साथ आंसूगैस के गोले का इस्तेमाल किया गया। कई छात्रों को कुछ घंटों के लिए हिरासत में लिया गया, जिनके पास चिकित्सा या कानूनी सहायता नहीं है। उसी के जवाब में, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और निहत्थे छात्रों पर क्रूर पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

Next Story